Press Trust of India | July 16, 2026 | 03:24 PM IST | 2 mins read
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी कीमती है और वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच करने में कोई आपत्ति नहीं है।

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर हर दिन नजर रखें और जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सीय मदद दें। वांगचुक यहां जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि जिंदगी कीमती है और सरकारी चिकित्सकों को वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए।
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी कीमती है और वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच करने में कोई आपत्ति नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा, ''हमारा मानना है कि किसी भी नागरिक की जिंदगी कीमती है और सरकारी अधिकारियों को उसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए।''
अदालत ने आदेश दिया, ''हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि वांगचुक की मेडिकल स्थिति पर रोजाना नजर रखी जाए और जो भी चिकित्सीय मदद जरूरी हो, वह दी जाए।''
अदालत ने वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताने वाली एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। सीजेपी नीट में कथित गड़बड़ियों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 25 दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रही है।
वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वांगचुक ने समर्थकों की अपील के बावजूद भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे गलत संदेश जाएगा।
वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है और उनके डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से भूख हड़ताल करने के कारण वह गंभीर चरण में पहुंच गए हैं और इससे उनके अंगों पर असर पड़ना शुरू हो सकता है।