CBSE Re-evaluation Fees: सीबीएसई री-इवैल्युएशन फीस में कटौती, नंबर बढ़े तो छात्रों को वापस मिलेगी पूरी रकम
Saurabh Pandey | May 17, 2026 | 03:44 PM IST | 2 mins read
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को पहली बार लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई ने सर्वप्रथम 2014 में ओएसएम की शुरुआत की थी।
नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 12वीं की परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर जारी चर्चाओं के बीच स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने छात्रों के हित में एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन्ड कॉपी प्राप्त करने और उनके पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की फीस को बेहद कम कर दिया है। इसके साथ ही छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए एक राहत भरी शर्त भी जोड़ी गई है।
स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि जो प्रक्रिया पहले 700 रुपये की थी, जिसके तहत हम आपको आपकी उत्तर पुस्तिका की स्कैन्ड कॉपी देते थे, उस फीस को अब घटाकर सिर्फ 100 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, कॉपियों के सत्यापन (Validation) की फीस जो पहले 500 रुपये हुआ करती थी, उसे भी कम करके अब मात्र 100 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई छात्र किसी एक विशेष प्रश्न के उत्तर की दोबारा जांच (Recheck) कराना चाहता है, तो उसे केवल 225 रुपये का भुगतान करना होगा।
नंबर बढ़े तो छात्रों को वापस मिलेगी पूरी रकम
सचिव ने छात्रों के हक में सबसे बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किसी भी वजह से छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो बोर्ड द्वारा ली गई पूरी की पूरी फीस छात्र को वापस (Refund) कर दी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार के लिए पैसा महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इस मामले में वह प्राथमिकता नहीं है। उनका पूरा ध्यान बच्चों की भलाई, कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति पर है।
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता का भरोसा देते हुए संजय कुमार ने कहा कि हम सीधे छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिका की एक डिजिटल कॉपी उपलब्ध करा रहे हैं। सिर्फ अपनी कॉपी को देखकर ही छात्रों को यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि मार्किंग (अंक देने की प्रक्रिया) किस तरह से की गई है। जब आप खुद इसकी समीक्षा करेंगे, तो आपको अंदाजा हो जाएगा कि किस जगह आपको और अधिक नंबर मिलने चाहिए थे।
डिजिटली स्कैन की गई हैं उत्तर पुस्तिकाएं
सचिव ने आगे स्पष्ट किया कि चूंकि सभी उत्तर पुस्तिकाएं पहले से ही डिजिटल रूप से स्कैन की जा चुकी हैं, इसलिए उन्हें नहीं लगता कि अब नए सिरे से फिर से पूरी परीक्षा (Re-examination) कराने की कोई आवश्यकता या कोई दूसरा विकल्प मौजूद है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों के मन से अंकों को लेकर हर तरह का संदेह दूर करना है।
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को पहली बार लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई ने सर्वप्रथम 2014 में ओएसएम की शुरुआत की थी, लेकिन तकनीकी और बुनियादी ढांचे की सीमाओं के कारण उस समय इसका व्यापक रूप से संचालन संभव नहीं हो पाया था।
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