सीबीएसई कक्षा 12 उत्तर पुस्तिका पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से एससी ने किया इनकार
Press Trust of India | August 25, 2026 | 04:55 PM IST | 2 mins read
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह केवल एक सप्ताह के लिए पोर्टल पुन: खोलने का अनुरोध कर रहे हैं।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (SC) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को उन छात्रों के लिए कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से 25 अगस्त (मंगलवार) को इनकार कर दिया, जिन्होंने ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर शिकायतें की थीं।
सीबीएसई की ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) व्यवस्था एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं की सीधे जांच करने के बजाय उनके स्कैन किए गए स्वरूप को कंप्यूटर पर देखते हुए अंक देते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पुनर्मूल्यांकन का पोर्टल सभी छात्रों के लिए निर्धारित अवधि तक खुला था। इसे दोबारा खोलने से नए दावों की भरमार आ सकती है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम उन्हें आपके लिए यह मौका दोबारा देने का निर्देश क्यों दें? अगर आप बस पर नहीं चढ़ते, तो बस छूट जाती है। यह अवसर सभी के लिए एक निश्चित अवधि तक खुला था।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह केवल एक सप्ताह के लिए पोर्टल पुन: खोलने का अनुरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वेबसाइट ठप हो गई थी और कई छात्र ऑन-स्क्रीन सत्यापन के लिए आवेदन नहीं कर सके।”
सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि निर्धारित अवधि के दौरान 1.68 लाख छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ऐसी ही एक याचिका पहले ही खारिज कर चुका है।
उच्चतम न्यायालय उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए सीबीएसई द्वारा ओएसएम व्यवस्था लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग शुरू होने के बाद कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं जिनमें कुछ पन्नों का स्कैन नहीं होना, स्कैन की गई प्रतियां स्पष्ट न होना तथा कुछ उत्तरों या पन्नों का मूल्यांकन नहीं किया जाना शामिल हैं।
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