देश में फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ राज्य सरकारें दर्ज कराएं FIR- शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार
Saurabh Pandey | August 5, 2026 | 10:42 PM IST | 2 mins read
शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि फर्जी विश्वविद्यालयों को कैसे चिह्नित करके उनके खिलाफ कारवाई की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकारों से भी कार्रवाई करने की अपील की है।
नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने फरवरी 2026 में देश भर में चल रहे 32 संस्थानों को 'फर्जी यूनिवर्सिटी' के तौर पर चिह्नित किया था। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में खुद को यूनिवर्सिटी बताने वाले या फर्जी यूनिवर्सिटी के खिलाफ कमीशन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे संस्थानों को स्पष्टीकरण मांगने वाले पत्र, नियमों के पालन से जुड़े पत्र, कारण बताओ नोटिस और चेतावनी नोटिस जारी किए गए थे, ताकि उन्हें बिना इजाजत काम करने के नतीजों के बारे में आगाह किया जा सके।
यूजीसी ने छात्रों और आम जनता में जागरूकता लाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं-
- अमान्य डिग्री प्रदान करने वाले अनाधिकृत संस्थानों को स्पष्टीकरण या टिप्पणी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी की गई है।
- यूजीसी की वेबसाइट पर समय-समय पर राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची प्रकाशित और अपलोड की जाती है।
- आम जनता, छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों में फर्जी विश्वविद्यालयों के संबंध में जागरूकता पैदा करने के लिए यूजीसी की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समय-समय पर सार्वजनिक सूचनाएं जारी की जाती हैं।
- छात्रों को प्रवेश लेने से पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से उच्चतर शिक्षण संस्थानों (एचईआई) की प्रमाणिकता जांचने की सलाह दी जाती है।
राज्य सरकारे करें कार्रवाई
सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया जाता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करें तथा आवश्यकता पड़ने पर ऐसे संस्थानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएं।
फर्जी विश्वविद्यालयों और अनाधिकृत संस्थानों की समस्या पर रोक लगाने के लिए यूजीसी ने 30 मई 1996 को एंटी-माल-प्रैक्टिस सेल (एएमपीसी) की स्थापना की थी। एएमपीसी देश में फर्जी या गैर-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों/संस्थानों के अस्तित्व और संचालन से संबंधित मामलों को देखता है, जो यूजीसी अधिनियम, 1956 के उल्लंघन में कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं या डिग्री प्रदान कर रहे हैं।
यूजीसी कैसे करता है कार्रवाई?
जब भी किसी अनाधिकृत संस्था द्वारा डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जाने के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो यूजीसी उस संस्था को नोटिस जारी कर सूचित करता है कि वह डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत नहीं है और उससे स्पष्टीकरण मांगा जाता है। यदि प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होता है, तो संस्था का नाम यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल कर दिया जाता है। फरवरी 2026 में प्रकाशित लेटेस्ट सूची के अनुसार, 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालयों के रूप में चिन्हित किया गया है। फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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