Press Trust of India | September 20, 2026 | 06:33 PM IST | 2 mins read
धामी ने कहा कि सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन के दौरान यदि दस्तावेज फर्जी पाए गए तो न केवल उन्हें निरस्त किया जाएगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
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देहरादून: उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिए जाने के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए सभी आरक्षित श्रेणियों में प्रमाणपत्रों की जांच करने का निर्देश दिया है। 19 सितंबर को देर रात जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए दाखिला लेने को ''नकल जैसा ही संगीन अपराध'' बताया। उन्होंने कहा, ''इस प्रकरण के संज्ञान में आते ही हमने अधिकारियों को पारदर्शी जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।''
धामी ने कहा कि सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन के दौरान यदि दस्तावेज फर्जी पाए गए तो न केवल उन्हें निरस्त किया जाएगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
नीट यूजी 2026 में उत्तराखंड के लिए केंद्रीकृत परामर्श सत्र में फर्जी प्रमाणपत्र की शिकायत सामने आने के बाद सीएम ने जांच के आदेश दिए, ताकि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने अनुचित लाभ लेने वालों और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
देहरादून जिला प्रशासन की ओर से की गई जांच के बाद अब तक कुल 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए गए हैं और इनके आधार पर उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द की जा चुकी है।
हालांकि, इस बीच कुछ और छात्रों द्वारा अन्य आरक्षित श्रेणियों में कूटरचित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका को देखते हुए सभी प्रकार की आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश लेने के मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी की जांच के दौरान पता चला कि संबंधित अभ्यर्थियों ने धर्मवीर नाम के स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने के फर्जी प्रमाणपत्र का लाभ लेकर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान संबंधित तथ्यों की पुष्टि के लिए एसआईटी ने धर्मवीर के परिजनों से संपर्क किया और उनके पुत्र एवं पौत्र के बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा प्रमाणपत्र से संबंधित राजस्व अभिलेखों और उसे जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी हासिल करने के लिए पटवारी के बयान भी दर्ज किए गए।
उन्होंने बताया कि जांच में आरोपियों के अभिलेखों में दर्ज पते भी सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए हैं। एसआईटी जांच का नेतृत्व कर रहीं देहरादून की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी ने कहा, ''प्रकरण से संबंधित सभी तथ्यों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का संकलन और परीक्षण किया जा रहा है। विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।''
पहला दिन बीआर्क, बीटेक, इंटीग्रेटेड एमटेक, इंटीग्रेटेड एमएससी, आईडीडी, बीएस-एमएस और बीएस प्रोग्राम के अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए रहा। डिग्री पाने वाले 1,277 छात्रों में से 1,001 पुरुष और 276 महिला छात्र शामिल रहीं।
Santosh Kumar