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Abhyuday 3: सीएसआईआर-NIScPR, आईआईटी इंदौर और जोधपुर ने तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ का किया आयोजन

Abhay Pratap Singh | January 7, 2026 | 12:21 PM IST | 2 mins read

तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ का उद्देश्य तकनीकी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और समाज के व्यापक वर्गों तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पहुंच को मजबूत करना है।

तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ आमंत्रित लेक्चर और समापन सत्र के साथ समाप्त हुई। (स्त्रोत-पीआईबी)
तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ आमंत्रित लेक्चर और समापन सत्र के साथ समाप्त हुई। (स्त्रोत-पीआईबी)

नई दिल्ली: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंदौर (IIT Indore) में दो दिवसीय तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। ‘अभ्यूदय-3’ कार्यक्रम 5 और 6 जनवरी को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), आईआईटी इंदौर तथा आईआईटी जोधपुर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय-3’ का उद्देश्य तकनीकी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और समाज के व्यापक वर्गों तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पहुंच को मजबूत करना है। आईआईटी इंदौर के निदेशक ने तकनीकी हिंदी के महत्व, प्रभावी विज्ञान संचार की भूमिका व अनुसंधान और नवाचार को आम जनता से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

‘अभ्युदय-3’ प्रोग्राम में साइंस, इंजीनियरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी और नवाचार से जुड़े विषयों पर गेस्ट लेक्चर आयोजित किए गए। दो पेपर प्रेजेंटेशन सेशन के भी हुए, जिसमें 25 प्रतिभागियों ने हिंदी भाषा में अपने रिसर्च और आइडिया साझा किए। यह संगोष्ठी 6 जनवरी 2026 को आमंत्रित लेक्चर और समापन सत्र के साथ समाप्त हुई।

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सीएसआईआर - एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक सीबी सिंह ने तकनीकी हिंदी के विकास, प्रभावी विज्ञान संचार के महत्व और अनुसंधान एवं नवाचार को समाज के बड़े तबकों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हिंदी भाषा में वैज्ञानिक ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने में सीएसआईआर-NIScPR के योगदान पर भी प्रकाश डाला।

आगे कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म विज्ञान, टेक्नोलॉजी और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के बीच एक सशक्त सेतु बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक विचारों को आम लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाने का एक प्रभावशाली माध्यम हैं। इस दौरान उन्होंने 1952 से लोकप्रिय हिंदी विज्ञान पत्रिका “विज्ञान प्रगति” का भी जिक्र किया।

पीआईबी के अनुसार, संगोष्ठी के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसके बाद एक विज्ञान कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें देशभर से आए विज्ञान कवियों ने कविता के माध्यम से विज्ञान, प्रद्योगिकी, नवाचार और सामाजिक चिंताओं जैसे विषयों को अभिव्यक्त किया। वहीं, लेखक और विज्ञान संचार विशेषज्ञ संतोष चौबे ने विज्ञान कवि सम्मेलन सत्र की अध्यक्षता की।

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