Saurabh Pandey | May 23, 2026 | 10:01 PM IST | 3 mins read
यूपीएससी कल 24 मई 2026 को देश भर के 83 केंद्रों पर सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करेगा, जिसमें 933 पदों के लिए करीब 8.19 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे। इस बार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आयोग परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद आधिकारिक आंसर-की जारी कर देगा।
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नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा रविवार, 24 मई 2026 को देश भर में सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस वर्ष करीब 933 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए रिकॉर्ड 8,19,372 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाकर अपना ई-एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। एडमिट कार्ड पर उम्मीदवार की निजी जानकारी, परीक्षा केंद्र का पता और रिपोर्टिंग समय जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं।
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यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह ऑफलाइन (OMR शीट आधारित) मोड में दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। सुबह की शिफ्ट में सामान्य अध्ययन (General Studies Paper I) और दोपहर की शिफ्ट में सिविल सेवा योग्यता परीक्षा (CSAT Paper II) का पेपर होगा।
इस वर्ष उम्मीदवारों की भारी संख्या को देखते हुए आयोग ने परीक्षा केंद्रों की संख्या 80 से बढ़ाकर 83 कर दी है। तीन नए केंद्र कानपुर, मेरठ और भुवनेश्वर में बनाए गए हैं, जहां से लगभग 23,000 अभ्यर्थियों ने परीक्षा देने का विकल्प चुना है।
परीक्षा की पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए यूपीएससी ने इस वर्ष एक फैसला लिया है। इस बार प्रारंभिक परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद आधिकारिक आंसर-की जारी कर दी जाएगी। इससे पहले आंसर-की फाइनल रिजल्ट आने के बाद जारी की जाती थी। आयोग के अनुसार, इस नई व्यवस्था से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और छात्र समय रहते अपने प्रदर्शन का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे।
यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) सहित अन्य ग्रुप 'ए' और ग्रुप 'बी' केंद्रीय सेवाओं में चयन के लिए पहला चरण है। आमतौर पर इस परीक्षा का परिणाम 30 से 40 दिनों के भीतर घोषित कर दिया जाता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो उम्मीदवार पिछली परीक्षाओं के आधार पर पहले से ही IAS या IFS अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, वे इस परीक्षा (CSE 2026) में बैठने के लिए पूरी तरह अयोग्य हैं। यह प्रतिबंध परीक्षा के पहले चरण से ही लागू होता है।