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पहले शिक्षा उपेक्षित थी, अब छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर में भारी कमी आई - यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ

Press Trust of India | April 5, 2026 | 02:52 PM IST | 3 mins read

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महीने से सरकार अनुदेशकों को 17,000 और शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये का मानदेय लागू करने जा रही है।

सीएम ने वाराणसी में 'स्कूल चलो अभियान' की शुरुआत की। (इमेज- आधिकारिक एक्स/ सीएम योगी)
सीएम ने वाराणसी में 'स्कूल चलो अभियान' की शुरुआत की। (इमेज- आधिकारिक एक्स/ सीएम योगी)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले ''शिक्षा सरकार के एजेंडे में नहीं थी'' लेकिन अब छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई है। आदित्यनाथ ने पूर्व की सरकारों पर ''नकल को बढ़ावा देने'' का आरोप लगाया। वाराणसी में 'स्कूल चलो अभियान' की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, ''इस नकल को संभव बनाने के लिए, उनके लिए यह आवश्यक था कि स्कूलों के भीतर कोई वास्तविक शिक्षण कार्य या पढ़ाई न हो।''

यह अभियान राज्य भर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। यह अभियान 15 अप्रैल को समाप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महीने से सरकार अनुदेशकों को 17 हजार और शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये का मानदेय लागू करने जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक, अनुदेशक, रसोइयों के लिए पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय को वास्तविक अर्थों में जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सभी को शिक्षित होने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने 'स्कूल चलो अभियान' की शुरूआत पर बच्चों को मध्याह्न भोजन भी परोसा। आदित्यनाथ ने 2017 से पहले कक्षा तीन, चार, पांच और छह के बाद बच्चों के स्कूल छोड़ने के कारणों को गिनाते हुए कहा, ''जब भी मैं किसी भी सड़क से गुजरता था, मैं पूरे दिन बच्चों को घूमते हुए देखता था। जब उनसे पूछा जाता था कि आप इधर-उधर क्यों घूम रहे हैं? आप स्कूल क्यों नहीं जा रहे हैं? तो वे यही जवाब देते कि स्कूल बहुत दूर है।''

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मुख्यमंत्री ने कहा, ''हमने पूरे राज्य से आंकड़े एकत्र किए। इसका विश्लेषण करने पर हमने पाया कि बच्चों के स्कूल नहीं जाने का कारण शौचालयों का अभाव था, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा नहीं थी, न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था थी।'' स्कूल छोड़ने की दर में गिरावट का उल्लेख करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ''आज, मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) से प्रेरित होकर और उनके मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में अब बेसिक शिक्षा परिषद के तहत लगभग सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा के साथ-साथ पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है।''

उन्होंने कहा कि स्कूल छोड़ने की दर 19 प्रतिशत से घटकर आज केवल तीन प्रतिशत रह गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े अधिकारियों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे स्कूल छोड़ने की दर को शून्य पर लाने की दिशा में काम करें। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट के जिलाधिकारी का उदाहरण देकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे का प्रवेश आंगनवाड़ी केंद्र में कराया।

उन्होंने कहा, ''यह काम शिक्षक भी कर सकते हैं। जहां आप पढ़ा रहे हैं, वहीं बच्चों को लेकर जाइए। बच्चा पढ़ेगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सरकार बेसिक शिक्षा के विद्यालयों को संसाधन उपलब्ध करा रही है तो आप भी इन्हें कॉन्वेंट, पब्लिक स्कूल व केंद्रीय विद्यालय की तरह कार्य करने में सक्षम बनाएं।'' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'शैक्षिक नवाचार एवं उपलब्धियां' पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान अभियान से जुड़ी लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने नए शैक्षणिक सत्र की पाठ्य पुस्तकों का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री के हाथों जनपद के पांच 'निपुण विद्यालय' को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

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