Press Trust of India | May 22, 2026 | 01:46 PM IST | 1 min read
याचिकाकर्ता के वकील ने एससी के समक्ष मामला रखते हुए कहा, “बच्चे अचानक ये भाषाएं कैसे सीख सकते हैं और फिर कक्षा 10 की परीक्षा दे सकते हैं? इससे अराजकता फैल जाएगी।”

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने 22 मई (शुक्रवार) को कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा, जिसके तहत 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई 1 जुलाई से अनिवार्य की गई है।
इस नीति के तहत इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया।
रोहतगी ने कहा, “यह एक अत्यावश्यक जनहित याचिका (PIL) है। याचिकाकर्ता विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक हैं। वे सीबीएसई की उस नयी नीति को चुनौती दे रहे हैं, जिसके तहत नौवीं कक्षा में दो और भाषाएं अनिवार्य कर दी गई हैं।”
अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया और कहा, “इससे (इस नीति से) अव्यवस्था पैदा होगी।” भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगले सप्ताह विविध मामलों की सुनवाई होगी और इस मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिकाकर्ता के वकील रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला रखते हुए कहा, “बच्चे अचानक ये भाषाएं कैसे सीख सकते हैं और फिर कक्षा 10 की परीक्षा दे सकते हैं? इससे अराजकता फैल जाएगी।” भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हम इस पर अगले सप्ताह सुनवाई करेंगे।”
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा हाल में जारी एक परिपत्र के अनुसार, बोर्ड ने 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं की पढ़ाई एक जुलाई से अनिवार्य कर दी है।