Santosh Kumar | February 25, 2026 | 02:34 PM IST | 1 min read
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने दलील दी कि ''कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।''

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे ''गंभीर चिंता का विषय'' बताया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि ''कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।''
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' उन्होंने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है.. मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।''
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें। अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं। मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा।"
बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। कक्षा 8 के लिए एनसीईआरटी की नयी समाज विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अनुसार, भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली ''चुनौतियों'' में से हैं।
नयी पुस्तक के ''न्यायपालिका में भ्रष्टाचार'' खंड में कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है।
हरियाणा बोर्ड कक्षा 12 की परीक्षा में लाखों स्टूडेंट्स शामिल होंगे। एचबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 राज्य भर के 1,431 परीक्षा केंद्रों पर हो रही हैं। बोर्ड ने सभी स्टूडेंट्स से अपील की है कि वे समय पर केंद्रों पर पहुँचें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स साथ लाएं।
Santosh Kumar