Jharkhand News: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में सिर्फ जेटेट पास अभ्यर्थी होंगे शामिल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Santosh Kumar | January 31, 2025 | 11:34 AM IST | 2 mins read
जेएसएससी ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की। हाईकोर्ट के आदेश पर सीटेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी भी इस परीक्षा में शामिल हुए।
नई दिल्ली: झारखंड में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर संयुक्त परीक्षा 2023 पर फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें पड़ोसी राज्य झारखंड के सीटीईटी पास और टीईटी पास अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को भी रद्द कर दिया है। इस मामले को जेटेट अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। झारखंड हाईकोर्ट ने पहले के फैसले में सीटीईटी अभ्यर्थियों को भी शामिल करने का आदेश दिया।
झारखंड हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 12 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। झारखंड सरकार ने 26,001 सहायक आचार्य पदों पर नियुक्ति की घोषणा की थी।
Jharkhand JTET News: सीटेट अभ्यर्थी परीक्षा में हुए थे शामिल
आवेदक परिमल कुमार व अन्य ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में झारखंड सरकार और जेएससीसी को सुप्रीम कोर्ट की परमिशन के बिना रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी।
जेएसएससी ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की। हाईकोर्ट के आदेश पर सीटेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी भी इस परीक्षा में शामिल हुए। इस संबंध में परिमल कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
JTET News: सीटेट पास क्यों नहीं दे सकते परीक्षा?
सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षा नियमों के अनुसार ही आयोजित की गई। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थी की ओर से वकीलों ने बताया कि आरटीई की धारा 23(2) और नियम 10 के तहत उस राज्य के टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही शिक्षक भर्ती में भाग ले सकते हैं, जिन्हें वहां की भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाजों का ज्ञान हो।
झारखंड में मुख्य रूप से संथाली, खोरठा आदि क्षेत्रीय भाषाएं हैं और जेटेट पास करने वाले अभ्यर्थियों को इन भाषाओं का ज्ञान होता है। लेकिन सीटेट पास करने वाले अभ्यर्थियों को केवल हिंदी या अंग्रेजी ही अच्छी तरह आती है।
ऐसे में जब इन सीटीईटी परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों की नियुक्ति झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों में होगी तो उन्हें स्थानीय भाषाओं में बच्चों को पढ़ाने में कठिनाई होगी, जिससे बच्चे भी विषय को ठीक से समझ नहीं पाएंगे।
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