Santosh Kumar | May 22, 2026 | 03:14 PM IST | 2 mins read
जारी अधिसूचना के अनुसार, लेक्चरर परीक्षा केंद्र पर, उम्मीदवारों को हर सत्र के लिए परीक्षा शुरू होने से केवल 60 मिनट पहले तक ही प्रवेश दिया जाएगा।

नई दिल्ली: राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने स्कूल लेक्चरर प्रतियोगी परीक्षा 2025 की एग्जाम सिटी स्लिप व एडमिट कार्ड संबंधी अधिसूचना की है। आरपीएससी 31 मई से 11 जून तक लेक्चरर, लेक्चरर (कृषि) और कोच (माध्यमिक शिक्षा विभाग) के लिए प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करेगा। परीक्षा में, प्रत्येक प्रश्न पत्र के लिए ओएमआर उत्तर पुस्तिका के 5वें विकल्प भरने के लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
आरपीएससी स्कूल लेक्चरर परीक्षा की 'सिटी स्लिप' एग्जाम डेट से 7 दिन पहले एसएसओ पोर्टल पर जारी की जाएगी। इसके बाद, परीक्षा से 3 दिन पहले एडमिट कार्ड आयोग की वेबसाइट और एसएसओ पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
जारी अधिसूचना के अनुसार, लेक्चरर परीक्षा केंद्र पर, उम्मीदवारों को हर सत्र के लिए परीक्षा शुरू होने से केवल 60 मिनट पहले तक ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना चाहिए, ताकि सुरक्षा जांच और पहचान की प्रक्रियाएं निर्धारित समय पर पूरी की जा सकें। देर से आने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उम्मीदवार एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि का उपयोग करके आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in या एसएसओ पोर्टल sso.rajasthan.gov.in से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
परीक्षा केंद्र पर पहचान के लिए हालिया रंगीन आधार कार्ड या कोई अन्य वैध फोटो आईडी साथ रखना अनिवार्य है। एडमिट कार्ड पर हालिया और स्पष्ट रंगीन फोटो चिपकानी होगी। एडमिट कार्ड में निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
आयोग ने अभ्यर्थियों को चेतावनी दी है कि परीक्षा में पास कराने के नाम पर किसी दलाल या ठग के झांसे में न आएं। रिश्वत मांगने या धोखाधड़ी की सूचना आयोग को दें। परीक्षा में नकल या अनुचित साधन अपनाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र की लोकेशन के लिए गूगल मैप पर निर्भर न रहें। तकनीकी त्रुटियों के कारण कुछ केन्द्रों की लोकेशन मैप पर अस्पष्ट हो सकती है। उम्मीदवार परीक्षा से एक दिन पहले सेंटर पर जाकर जगह की पुष्टि कर सकते हैं।
इस संबंध में, उन्होंने मोबाइल अलर्ट प्रणाली के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों में वनाग्नि की सूचना तत्काल उपलब्ध कराए जाने पर बल दिया। उन्होंने वनाग्नि नियंत्रण के लिए अल्मोड़ा जिले के 'शीतलखेत मॉडल' को प्रदेशभर में लागू करने को कहा।
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