पीएम मोदी की शिक्षकों को सलाह: खेल-कूद से घटाएं बच्चों का स्क्रीन टाइम, ड्रग्स के खिलाफ बढ़ाएं जागरूकता
Press Trust of India | September 5, 2026 | 04:51 PM IST | 2 mins read
प्रधानमंत्री ने बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम को खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से कम करने का आह्वान किया है। शिक्षकों ने कक्षा शिक्षण को अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए रचनात्मक तरीकों को साझा किया
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत करते हुए उनसे अपील की कि वे छात्रों में ड्रग की लत के मामलों को लेकर सतर्क रहें। साथ ही, उन्होंने कहा कि शिक्षकों को छात्रों को खेल-कूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक शौक जैसी पाठ्येतर गतिविधियों में शामिल करके उनके अत्यधिक स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को छात्रों की शैक्षणिक क्षमता से आगे बढ़कर उनके व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए। ड्रग से जुड़े मामलों पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में यह पता लगाना काफी मुश्किल होता है कि कोई छात्र इस समस्या की चपेट में है या नहीं, क्योंकि किसी को नहीं पता होता कि कौन किसे क्या दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में शिक्षकों को जागरूकता के लिए पहल करनी चाहिए और अगर किसी बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव दिखे, तो उस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
तीन विभागों से 82 शिक्षकों को मिला सम्मान
इस वर्ष, तीन विभागों से 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनमें विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक/संकाय सदस्य और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं। पुरस्कार विजेताओं ने अपने शिक्षण अनुभवों और नवाचारों के बारे में बताया। उन्होंने कक्षा शिक्षण को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए कई रचनात्मक तरीकों को साझा किया।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए बच्चों को कक्षा से बाहर ले जाकर उन्हें वास्तविक दुनिया के कौशल और कार्य के विभिन्न रूपों से जोड़ने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों से यह भी आग्रह किया कि वे केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान प्रदान करने तक ही सीमित न रहें, बल्कि बच्चों में श्रम की गरिमा जैसे मूल्यों को भी विकसित करने में सहयोग करें।
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