NEET Retest 2026: नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की ‘ओएमआर शीट’ में कोई छेड़छाड़ नहीं, सरकार ने अदालत में दी जानकारी

Press Trust of India | August 19, 2026 | 10:06 PM IST | 2 mins read

चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें ऐसी राहत मांगी गई है जो प्रदान नहीं की जा सकती।

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उच्च न्यायालय दो नीट उम्मीदवारों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि नीट यूजी की दोबारा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की ओएमआर शीट के साथ कोई छेड़छाड़ या हेरफेर नहीं की गई है। इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान, मेहता ने कहा कि दोबारा परीक्षा में "बड़े पैमाने पर हेरफेर" के बेबुनियाद आरोपों पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "किसी भी ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।"

उच्च न्यायालय दो नीट उम्मीदवारों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें उन्होंने खुद के साथ-साथ ''प्रभावित उम्मीदवारों" के लिए हटाए गए कुछ प्रश्नों के लिए अतिरिक्त अंक देने और एनटीए को समाप्त करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं में से एक ने यह आरोप भी लगाया था कि उसकी 'ओएमआर शीट' से छेड़छाड़ की गई है। इस याचिका में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर उठाई गई चिंताओं पर गौर करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग की गई थी।

NEET OMR Sheet 2026: नीट ओएमआर शीट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं

तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला नीट यूजी प्रश्न पत्र पर किए गए "रफ वर्क" और ओएमआर शीट पर चिह्नित किए गए उत्तर के बीच विसंगति का लगता है, और इसमें कोई हेरफेर नहीं हुई है।

उन्होंने सवाल किया, "ओएमआर शीट से कौन छेड़छाड़ करेगा?" दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि याचिका में उठाए गए ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और हटाए गए प्रश्नों के अंक न मिलने के मुद्दे हजारों उम्मीदवारों से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि केवल दो उम्मीदवार ने ही याचिका दायर की क्योंकि बाकी को उनके माता-पिता ने इसकी अनुमति नहीं मिली। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें ऐसी राहत मांगी गई है जो प्रदान नहीं की जा सकती।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि यदि कोई पीड़ित छात्र व्यक्तिगत तौर पर संपर्क करता है, तो वह इन मुद्दों पर विचार करेगी, न कि किसी जनहित याचिका के रूप में। अदालत ने कहा, "यह याचिकाओं का एक मिला-जुला रूप है जिसमें याचिकाकर्ता और अन्य सभी उम्मीदवारों के लिए राहत की मांग की गई है। ऐसी मिश्रित मांगों वाली रिट याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।"

इसके साथ ही अदालत ने याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने एक याचिकाकर्ता को नीट जैसी सार्वजनिक परीक्षाओं में संस्थागत सुधारों पर एक अलग जनहित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी, जबकि दूसरी उम्मीदवार को ओएमआर शीट में हेरफेर के अपने आरोपों के संबंध में अलग से याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान की।

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