Saurabh Pandey | June 29, 2026 | 04:26 PM IST | 3 mins read
नीट यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले में दिल्ली की कोर्ट ने आरोपी यश यादव और मांगीलाल बीवाल सहित 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ा दी है। सीबीआई जांच के अनुसार, आरोपियों ने आपस में मिलकर एक बड़ा नेटवर्क बनाया था और प्रश्नपत्रों को 10 से 12 लाख रुपये में विभिन्न उम्मीदवारों को बेचा था।

नई दिल्ली : दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सोमवार को नीट यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ा दी है। पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश किया गया था। इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूछताछ और जांच के आधार पर पेपर लीक के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है।
अदालत के समक्ष जिन 10 आरोपियों को तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया, उनमें यश यादव, मांगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, धनंजय लोखंडे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, मनीषा हवलदार और डॉ. मनोज शिरूरे शामिल हैं। इसके अलावा, मामले के दो अन्य आरोपी प्रहलाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर पहले से ही 8 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वी. के. पाठक और जांच अधिकारी बी. पी. राजू पेश हुए, जबकि कुछ आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता ए. पी. सिंह और अंबिका यादव ने पैरवी की।
सीबीआई की जांच में पेपर लीक की कड़ियों का बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि शुभम खैरनार ने सबसे पहले पेपर यश यादव को लीक किया था। इसके बाद यश यादव से मांगीलाल बीवाल ने अपने बेटे विकास बीवाल के लिए 10 लाख रुपये में यह लीक पेपर हासिल किया।
पूछताछ में मांगीलाल के बेटे विकास बीवाल ने बताया कि वह राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान यश यादव के संपर्क में आया था। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी मांगीलाल बीवाल के मोबाइल फोन से नीट के प्रश्नपत्र भी बरामद किए हैं।
सीबीआई के अनुसार, यह नेटवर्क यहीं नहीं रुका। मांगीलाल बीवाल ने अपने बेटे विकास के लिए पेपर हासिल करने के बाद दिनेश बीवाल और अन्य आरोपियों को शामिल कर एक बड़ी चेन बना ली। आरोप है कि मांगीलाल ने इस लीक प्रश्नपत्र को आगे विभिन्न मेडिकल उम्मीदवारों को 12-12 लाख रुपये में बेच दिया।
इस मामले में एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act), भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले, कोर्ट ने 9 जून को आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वहीं, एक अन्य आरोपी यश यादव को न्यायिक हिरासत में रहते हुए ही 21 जून को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में शामिल होने और अपनी बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, लातूर के डॉक्टर मनोज शिरुरे ने परीक्षा से पहले कथित मास्टरमाइंड पी.वी. कुलकर्णी से केमिस्ट्री के सवाल हासिल करने में तीन छात्रों की मदद करने में अहम भूमिका निभाई। इन तीन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर मालिक का बेटा भी शामिल था। पुणे स्थित अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी (APMA) में फिजिक्स पढ़ाने वाले तेजस हर्षद शाह पर आरोप है कि उन्हें सह-आरोपी मनीषा संजय हवलदार से फिजिक्स के लीक हुए सवाल मिले थे।
CBI का यह भी आरोप है कि पुणे की एजुकेशन कंसल्टेंट मनीषा वाघमारे ने उन छात्रों को इकट्ठा करने में बिचौलिए का काम किया, जिन्होंने खास कोचिंग सेशन में शामिल होने के लिए लाखों रुपये दिए थे। इन सेशन में कथित तौर पर वे सवाल बताए और उन पर चर्चा की गई, जो बाद में NEET-UG 2026 परीक्षा में आए थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, वाघमारे ने NTA द्वारा नियुक्त सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे की खास कोचिंग क्लास के लिए संभावित उम्मीदवारों की मदद की। मनीषा मंधारे पर बायोलॉजी पेपर लीक के मामले में कथित सह-मास्टरमाइंड होने का शक है। केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी की पहचान पेपर लीक नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड के तौर पर की गई है।