Press Trust of India | August 27, 2026 | 12:11 PM IST | 2 mins read
विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में लिफाफों के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। इनमें प्रश्नपत्र रखने वाला लिफाफा भी शामिल है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) ने बीएससी कृषि के एक और प्रश्नपत्र के कथित तौर पर लीक होने के मामले में पुलिस जांच की मांग की है। अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने तेलीबांधा थाने के प्रभारी को पत्र लिखकर एपीबी (फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स) के प्रश्नपत्र के कथित लीक की जांच करने का अनुरोध किया है। यह परीक्षा 19 अगस्त को 28 कृषि महाविद्यालयों में आयोजित की गई थी।
मामला राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में खबर प्रकाशित होने के बाद सामने आया। अखबार के पत्रकार ने विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी के साथ व्हाट्सऐप के जरिए इस विषय के प्रश्नों और उत्तरों वाली एक पीडीएफ भी साझा की थी।
विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की है। प्रारंभिक जांच के दौरान समिति ने उन लिफाफों की जांच की, जिनमें प्रश्नपत्र एक कृषि महाविद्यालय को भेजे गए और बाद में उन्हें विश्वविद्यालय को वापस कर दिया गया।
विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में लिफाफों के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। इनमें प्रश्नपत्र रखने वाला लिफाफा भी शामिल है। ये संकेत पुलिस द्वारा जांच किए गए पिछले प्रश्नपत्र लीक मामले में मिले संकेतों से मिलते-जुलते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अखबार में प्रकाशित खबर की प्रतियां, कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नों और उत्तरों वाली पीडीएफ, मूल प्रश्नपत्र तथा जांच समिति की रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है।
तेलीबांधा थाना पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। यह घटनाक्रम आईजीकेवी की परीक्षाओं से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक के सिलसिले के बीच सामने आया है।
दुर्ग जिले के एक प्रोफेसर और 5 छात्रों को प्रश्नपत्र लीक के मामले में गिरफ्तार किया गया। 20 अगस्त को कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक होने का पता चलने के बाद बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के 'एंटोमोलॉजी' विषय की परीक्षा रद्द कर दी गई थी।
वहीं, 24 अगस्त को आईजीकेवी ने सात अगस्त को आयोजित बीएससी कृषि प्रथम वर्ष की 'प्लांट पैथोलॉजी' (पादप रोग विज्ञान) की परीक्षा भी रद्द कर दी थी। पुलिस जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि के बाद यह कदम उठाया गया था।