आईसीएसआई परिणाम: सीएस एक्जीक्यूटिव, प्रोफेशनल परीक्षा के उत्तर खराब तरीके से जांचे गए, हजारों लोगों का आरोप
Team Careers360 | October 9, 2023 | 05:46 PM IST | 8 mins read
कंपनी सचिव पाठ्यक्रम के उम्मीदवारों का आरोप है कि icsi.edu पर "सुझाए गए उत्तरों" से मेल खाने के बावजूद उन्हें जून 2023 सीएस परीक्षा में कम अंक दिए गए।
नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के प्रोफेशनल प्रोग्राम के तीसरे वर्ष के छात्र हेमंत सिंह जून 2023 में वार्षिक परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा के परिणाम अगस्त 2023 में घोषित किए गए।
अपने अंकों से नाखुश हेमंत ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन के माध्यम से अपनी उत्तर प्रतियां हासिल की और पाया गया कि आईसीएसआई दिशानिर्देशों के अनुसार सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें विभिन्न पेपरों के कई प्रश्नों में कम अंक मिले थे। हालाँकि, वह रीचेकिंग के लिए आवेदन नहीं कर सकते है और उनको दिसंबर 2023 में फिर से परीक्षा में भग लेना होगा।
हेमंत ने कॅरियर्स360 को बताया, “मैंने आईसीएसआई द्वारा सुझाए गए उत्तरों के साथ अपने उत्तरों का मिलान किया और पाया कि मैंने सही उत्तर लिखे थे, लेकिन मुझे गवर्नेंस के पेपर में पांच अंक के प्रश्न में एक अंक और 10 अंक के प्रश्न के लिए एक अंक दिया गया था। मैं गवर्नेंस पेपर में फेल हो गया और अब मुझे मॉड्यूल 2 में फिर से बैठना है जिसमें गवर्नेंस और दो अन्य पेपर शामिल हैं। इससे कंपनी सचिव (सीएस) बनने के अपने सपने को पूरा करने में देरी हुई और मेरे आत्मविश्वास को झटका लगा।”
आईसीएसआई प्रत्येक पेपर के लिए अध्ययन सामग्री प्रदान करता है, जिसे आमतौर पर "मॉड्यूल" कहा जाता है। परीक्षा के बाद, संस्थान अपनी आधिकारिक वेबसाइट icsi.edu पर "सुझाए गए उत्तर" भी प्रकाशित करता है। सुझाए गए उत्तरों के आधार पर छात्रों की कॉपियाँ चेक की जाती हैं। छात्रों को कुछ शर्तों के साथ आरटीआई का उपयोग करके या आईसीएसआई को मेल करके अपनी उत्तर प्रतियां प्राप्त करने की भी सुविधा दी गई है। आईसीएसआई जून 2023 परीक्षा में अपने अंकों से नाखुश, हजारों एग्जिक्यूटिव (द्वितीय वर्ष) और प्रोफेशनल छात्रों ने यह समझने के लिए अपनी उत्तर प्रतियां के लिए आवेदन किया कि गलती आखिरकार कहां हुई। वे यह देखकर हैरान रह गए कि उन्हें सभी पेपरों में पांच और 10 अंकों के कई प्रश्नों में शून्य या एक अंक दिया गया था, जबकि उनके उत्तर मॉड्यूल और सुझाए गए उत्तरों दोनों के अनुरूप थे। उन्होंने अपने निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अपने शिक्षकों को उत्तर की प्रतियां भी भेजीं और अब आईसीएसआई पेपर-चेकिंग पद्धति से हतोत्साहित महसूस कर रहे हैं। उन्हें दिसंबर में दोबारा परीक्षा में बैठना होगा
आईसीएसआई और सीएस पाठ्यक्रम
आईसीएसआई भारत में कंपनी सचिवों (सीएस) के पेशे को विकसित और विनियमित करने वाला भारत का एकमात्र मान्यता प्राप्त पेशेवर निकाय है। ICSI भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MoCA) के तहत कार्य करता है। वर्तमान में, आईसीएसआई के रोल पर 65,000 से अधिक सदस्य और लगभग 2.5 लाख छात्र हैं। संस्थान का मुख्यालय नई दिल्ली में है; नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई में इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय हैं; और भारत भर में 72 चैप्टर हैं। किसी भी कंपनी में, एक कंपनी सचिव कॉर्पोरेट मामलों से संबंधित कानूनों के अनुरूप कानूनी मामलों, खातों और प्रशासन को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है।
भारत में, आईसीएसआई कंपनी सचिवों (सीएस) पाठ्यक्रम की पेशकश करता है, जिसमें तीन चरण शामिल हैं - फाउंडेशन कार्यक्रम, एग्जिक्यूटिव कार्यक्रम और प्रोफेशनल कार्यक्रम। सीएस फाउंडेशन कार्यक्रम में चार पेपर हैं, सीएस एग्जिक्यूटिव कार्यक्रम में आठ पेपर को दो मॉड्यूल में विभाजित किया गया है और सीएस प्रोफेशनल में नौ पेपर को तीन मॉड्यूल में बांटा गया है।
आईसीएसआई देश भर के विभिन्न केंद्रों में ऑफ़लाइन मोड में साल में दो बार जून और दिसंबर में परीक्षा आयोजित करता है। प्रत्येक पेपर 100 अंकों का होता है। किसी उम्मीदवार को परीक्षा में तब उत्तीर्ण घोषित किया जाता है, यदि प्रत्येक पेपर में एक बार में न्यूनतम 40% अंक हों मॉड्यूल के सभी विषयों में कुल 50% अंक प्राप्त किए हों। आईसीएसआई या इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के कम से कम पांच वर्षों से पेशेवर सदस्यों रहे लोग परीक्षा पत्र तैयार करते है और उत्तर प्रतियों की जांच करते हैं।
आईसीएसआई उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन
एग्जीक्यूटिव और प्रोफेशनल प्रोग्राम के छात्र शिकायत कर रहे हैं कि आईसीएसआई की "खराब कॉपी चेकिंग" के कारण उनकी मेहनत बर्बाद हो गई।
भले ही आईसीएसआई उत्तर प्रतियां प्रदान करता है, लेकिन उसने छात्रों से कहा है कि प्रतियों का उपयोग कानूनी उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक डोमेन में नहीं होना चाहिए या किसी के साथ या सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जाना चाहिए। छात्र अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन (अंकों का योग) के लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन उन्हें पुन: जांच के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं है।
एग्जिक्यूटिव कार्यक्रम के छात्र अमन ने कहा: “मुझे मॉड्यूल 1 के चार पेपरों में से दो में कम अंक मिले। मैंने उत्तर प्रतियां प्राप्त कीं और सुझाए गए उत्तरों के साथ अपने उत्तरों का मिलान किया। मैंने सही उत्तर लिखे थे लेकिन परीक्षक ने प्रत्येक प्रश्न में मुझे 0.5, एक या अधिकतम चार या पाँच में से दो अंक दिये थे। यह कॉपी चेकिंग का बहुत ही खराब मानक है जिसमें चेकर्स मॉड्यूल और सुझाए गए उत्तरों का पालन नहीं कर रहे हैं।"
हरनेत्रा तिवारी 2017 से सीएस की छात्रा रही हैं और उन्होंने अपना समय, ऊर्जा और प्रयास केवल इस पाठ्यक्रम के लिए समर्पित किया। वे बताती हैं, “मैंने इस कोर्स से स्विच करने की कोशिश भी नहीं की। पिछले दो प्रयासों से यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि चेकिंग पैटर्न ठीक नहीं है और अंकों में अनावश्यक कांट-छांट की जा रही है। इससे अगले प्रयास तक के छह महीने पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं। अगर मुझे प्रोफेशनल प्रोग्राम के मॉड्यूल 1 के दो पेपरों में कम अंक नहीं दिए गए होते तो मैं जल्द ही सीएस बन जाती। अब, मुझे दिसंबर में परीक्षा में बैठना होगा, जिसके परिणाम फरवरी 2024 में घोषित किए जाएंगे।”
प्रिंस कुमार ने आईसीएसआई से अपनी उत्तर प्रति भी प्राप्त की और सुझाए गए उत्तरों और मॉड्यूल के साथ इसका मिलान किया। “गवर्नेंस पेपर में दो प्रश्न थे जिनके उत्तर या एक वाक्य का संदर्भ तक मॉड्यूल में नहीं दिया गया था। ऐसे में हम अपने हिसाब से उत्तर लिखते हैं लेकिन हमें अंक नहीं देते। यह कैसे उचित है? ड्राफ्टिंग पेपर में, मुझे एक प्रश्न में 8 में से 5 अंक दिए गए, जबकि मैंने मॉड्यूल के अनुसार सही उत्तर लिखा था। अन्य पेपरों के कई प्रश्नों में, सही उत्तर लिखने के बावजूद भी मुझे शून्य अंक दिया गया है,” उन्होंने कहा।
ख़राब प्रदर्शन का असर बहुत कम उत्तीर्ण प्रतिशत में नजर आता है। सीएस प्रोफेशनल या सीएस एक्जीक्यूटिव में से किसी भी मॉड्यूल के लिए उत्तीर्ण प्रतिशत 15% तक भी नहीं पहुंच पाया है।
आईसीएसआई सीएस परिणाम जून 2023: प्रोफेशनल, एग्जिक्यूटिव रिणाम
|
मॉड्यूल |
सीएस एग्जिक्यूटिव उत्तीर्ण % |
सीएस प्रोफेशनल उत्तीर्ण % |
|
मॉड्यूल 1 |
5.85 |
9.07 |
|
मॉड्यूल 2 |
13.05 |
7.86 |
|
मॉड्यूल 3 |
— |
13.11 |
सीएस छात्रों को सेवाएं प्रदान करने वाले पुणे स्थित हाइब्रिड कोचिंग संस्थान यस एकेडमी के संस्थापक विकास वोहरा ने कहा कि उन्होंने इस साल जून की परीक्षा से पहले इस स्तर का कुछ भी "असामान्य" नहीं देखा था।
विकास ने कहा “एग्जिक्यूटिव कार्यक्रम के प्रतिभूति कानून और पूंजी बाजार के पेपर में, मैंने पाया कि फॉर्मूला-आधारित व्यावहारिक प्रश्न का सुझाया गया उत्तर गलत था। जिन छात्रों ने सही उत्तर की गणना की, उन्हें शून्य अंक दिए गए क्योंकि चेकर्स ने सुझाए गए उत्तर में उल्लिखित गलत उत्तर पर भरोसा किया। यह चार अंकों का प्रश्न था और कई छात्र इस प्रश्न के कारण अर्हता अंक प्राप्त करने में असफल रहे। आप उनकी मानसिक स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जब उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठना पड़ता है, भले ही उनकी कोई गलती न हो।''
कॅरियर प्रभावित और आईसीएसआई से अनुरोध
छात्रों का कहना है कि कुछ विषयों में कम अंकों के कारण फेल होने के बाद उनके करियर पर असर पड़ा है। प्रोफेशनल कार्यक्रम के छात्र शिव तिवारी ने कहा, “मेरे परिवार के सदस्य सोचते हैं कि मैंने ठीक से पढ़ाई नहीं की और परीक्षा में असफल होने के लिए मैं दोषी हूं। मैं आईसीएसआई के अंकन मानदंड को समझ नहीं पा रहा जिसके कारण मैं अन्य लोगों की तरह दो विषयों में फेल हो गया।”
छात्रों ने उत्तर प्रतियों की "उचित" चेकिंग और रीचेकिंग सुविधा के लिए ICSI से अनुरोध किया है। कई छात्रों ने आईसीएसआई के अध्यक्ष सीएस मनीष गुप्ता, जो कि संस्थान की परीक्षा समिति के प्रमुख भी हैं, को भी ईमेल किया है।
विकास जो पिछले 13 वर्षों से सीएस छात्रों को पढ़ा रहे हैं, ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों से प्रश्नों का कठिनाई स्तर उच्च रहा है और जाँच पद्धति चीजों को बदतर बना रही है। उन्होंने कहा, “पिछले प्रयासों की तुलना में, इस बार मूल्यांकन अपेक्षाकृत कड़ाई से किया गया। हालाँकि, आप ICSI को पूरी तरह से दोष नहीं दे सकते। मैंने कई विद्यार्थियों की उत्तर प्रतियाँ देखी हैं। कड़ाई से चेकिंग होने और कुछ प्रश्नों में खराब मार्किंग और गलत उत्तरों के कारण, प्रत्येक सीएस छात्र को लग रहा है कि उन्होंने परीक्षा में अच्छा लिखा है लेकिन संस्थान ने उन्हें फेल कर दिया है। हालाँकि, हर मामले में ऐसा नहीं होता है। छात्रों को हर चीज के लिए संस्थान को दोष देने के बजाय कड़ी मेहनत करनी होगी और अपना स्तर बेहतर करना होगा।”
निष्पक्ष जांच के लिए आईसीएसआई से अनुरोध करते हुए, वोहरा ने कहा: “पाठ्यक्रम इतना बड़ा है और आप छात्रों से शब्द दर शब्द उत्तर की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। स्मृति कौशल की जाँच करने के बजाय, छात्रों को कानून की उनकी व्याख्या के आधार पर अंक दिया जाना चाहिए। संस्थान के शिक्षकों को प्रश्नों को हल करना चाहिए और यही प्रश्नपत्रों की जाँच का मानक होना चाहिए। उन सभी पेपरों की दोबारा जांच की जानी चाहिए जिनमें चेकर्स ने गलत मार्किंग की है और छात्रों को उचित अंक दिए जाने चाहिए।'
कॅरियर्स360 ने आईसीएसआई के चेयरमैन सीएस मनीष गुप्ता को एक मेल भेजकर छात्रों के आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन प्रकाशन के समय तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था। यदि वह ऐसा करते हैं तो इसे खबर में जगह दी जाएगी।
अनुरोध पर छात्रों के नाम बदल दिए गए हैं।
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