Abhay Pratap Singh | September 11, 2026 | 04:03 PM IST | 2 mins read
यूपी प्रशासन के आदेश में अक्षत त्रिपाठी पर सरकार विरोधी प्रचार करने और साथी छात्रों को सीजेपी द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र से 500000 रुपये का बॉन्ड भरवाने वाले कार्यकारी मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट (SC) ने उत्तर प्रदेश के जिला मजिस्ट्रेट को तलब कर छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी करने की वजह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
कार्यकारी मजिस्ट्रेट के निलंबन पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “SFI UP राज्य समिति के सदस्य अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ 5 लाख रुपये के बॉन्ड नोटिस को मंजूरी देने वाले ग्रेटर नोएडा के एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट का सस्पेंशन छात्र समुदाय की जीत है।”
सुप्रीम कोर्ट ने जारी नोटिस में कहा था कि, “यूपी प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्पष्टीकरण देना होगा। यही कारण है कि संवैधानिक अधिकार और न्यायिक निगरानी महत्वपूर्ण हैं।”
उत्तर प्रदेश जिला प्रशासन द्वारा गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के द्वितीय वर्ष के लॉ के छात्र अक्षत त्रिपाठी को शांति बनाए रखने के लिए एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने और 5 लाख रुपये की जमानत राशि का भुगतान करने का आदेश देने के कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट का यह नोटिस आया है।
सॉलिसिटर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी करने वाले एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट को सस्पेंड कर दिया गया है। जिसके बाद एसएफआई ने कहा, सत्ता का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए चेतावनी: हम चुप नहीं रहेंगे। मोदी और योगी सावधान रहें - छात्र पलटवार करते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग करने वाले छात्र को इस तरह की “असमानुपाती कार्रवाई” के माध्यम से “डराया” नहीं जाना चाहिए।
सीजेपी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यूपी सरकार का 5 लाख रुपये का जमानत बॉन्ड लगाना गैर-कानूनी था। छात्रों को विरोध करने का अधिकार होना चाहिए, चाहे वे दिल्ली में हों या यूपी में। यूपी में सिर्फ अपने स्थानीय सरकारी स्कूलों का ऑडिट करने पर जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है, वह भी मंजूर नहीं है।”
सीजेपी की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, नोएडा प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के छात्र के खिलाफ की गई कार्रवाई “पूरी तरह से अस्वीकार्य” थी। बता दें, नोएडा पुलिस द्वारा अक्षत के खिलाफ जारी आदेश उसी दिन रद्द कर दिया गया था जिस दिन वह जारी किया गया था।