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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में स्कूलों में बाहरी लोगों और यूट्यूबर्स के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश

Press Trust of India | August 18, 2026 | 05:46 PM IST | 2 mins read

शिक्षकों को निर्देश दिया गयाकि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति, यूट्यूबर या सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश कर तस्वीरें या वीडियो बनाने की अनुमति नहीं दी जाए।

आदेश में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
आदेश में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। इस फैसले की शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने आलोचना की। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चंद्र श्रीवास्तव ने 17 अगस्त को जारी आदेश में कहा कि कुछ बाहरी लोग और यूट्यूबर्स बिना अनुमति परिषदीय विद्यालयों में प्रवेश कर रहे हैं तथा सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए विद्यालयों और कर्मचारियों की तस्वीरें एवं वीडियो बना रहे हैं।

आदेश के अनुसार, ऐसी गतिविधियों से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, शिक्षण पेशे की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है और विभाग की छवि खराब हो रही है। आदेश में बताया गया कि परिषदीय विद्यालयों के निरीक्षण और निगरानी के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को पहले ही नामित किया जा चुका है।

आगे कहा गया कि, विद्यार्थियों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे सभी बाहरी लोगों का प्रवेश तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है। शिक्षकों को निर्देश दिया गयाकि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति, यूट्यूबर या सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश कर तस्वीरें या वीडियो बनाने की अनुमति नहीं दी जाए। हालांकि, निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों को आगंतुक रजिस्टर में हस्ताक्षर करना होगा। Also readमहाराष्ट्र में दो साल में आश्रम स्कूल के 584 छात्रों की हुई मौत, आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी ने दी जानकारी

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक राजेश कुमार सिंह ने आदेश को “तानाशाहीपूर्ण” बताते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए सार्वजनिक निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर लोगों को विद्यालयों में जाने से रोका जाएगा, तो उन्हें कैसे पता चलेगा कि बच्चों को ठीक से पढ़ाया जा रहा है या नहीं अथवा उन्हें गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन मिल रहा है या नहीं?”

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष अरविंद कुमार द्विवेदी ने कहा कि सार्वजनिक निगरानी से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं, बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और जर्जर स्कूल भवनों से कोई सुरक्षा जोखिम तो नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार और प्रशासन द्वारा अधिक पारदर्शिता से जनता का विश्वास बढ़ेगा।”

सामाजिक कार्यकर्ता देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया, लेकिन कहा कि अभिभावकों को विद्यालयों में आने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग से हर एक-दो महीने में अभिभावक-शिक्षक बैठक कराने का निर्देश देने का सुझाव दिया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि बाहरी लोगों के प्रवेश से विद्यालयों में शिक्षण कार्य बाधित हो रहा था और इसी कारण यह कदम उठाया गया।

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