NEET UG 2026 Controversy: फाइमा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, NTA को बदलने, न्यायिक निगरानी में परीक्षा कराने की मांग
Saurabh Pandey | May 13, 2026 | 12:23 PM IST | 2 mins read
FAIMA ने मांग की है कि जब तक एक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था का गठन नहीं हो जाता, तब तक एक 'हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी' बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें और इसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ व फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को भी शामिल किया जाए।
नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर विवाद अब देश की शीर्ष अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को सिस्टम की विफलता करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में न केवल परीक्षा में हुई गड़बड़ियों पर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि एनटीए के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव और न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है।
यह याचिका नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द करने और केंद्र द्वारा जांच सीबीआई को सौंपने के कुछ दिनों बाद दायर की गई है। रिपोर्टों में कहा गया है कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर प्रसारित हो रहे "अनुमानित प्रश्नपत्र" कथित तौर पर वास्तविक परीक्षा पत्र के 100 से अधिक प्रश्नों से मेल खाते थे।
याचिका में एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति के गठन की भी मांग की गई है, जिसमें एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फोरेंसिक वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह समिति नीट-यूजी 2026 के पुनर्संचालन की निगरानी करेगी जब तक कि एक नए स्वतंत्र परीक्षा निकाय का औपचारिक रूप से गठन नहीं हो जाता।
न्यायिक सुपरविजन में परीक्षा कराने की मांग
अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि एनटीए को हटाकर उसके स्थान पर एक अधिक "मजबूत, तकनीकी रूप से एडवांस्ड और स्वायत्त निकाय (Autonomous Body)" का गठन किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा को रद्द कर इसे न्यायिक सुपरविजन के तहत नए सिरे से आयोजित किया जाए, ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट और पारदर्शिता की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दे। इसमें पहचाने गए नेटवर्क, की गई गिरफ्तारियों, आरोपित व्यक्तियों और अभियोजन की प्रगति का पूरा विवरण मांगा गया है। इसके अलावा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विसंगतियों का पता लगाने के लिए सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है, ताकि किसी विशेष परीक्षा केंद्र पर हुई गड़बड़ी को आसानी से पहचाना जा सके।
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डिजिटल लॉक और सीबीटी मॉडल का प्रस्ताव
परीक्षा प्रणाली में भविष्य में सेंधमारी रोकने के लिए याचिका में तकनीकी बदलावों पर जोर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि प्रश्नपत्रों के लिए 'डिजिटल लॉकिंग' प्रणाली अपनाई जाए। साथ ही, पेपर लीक के जोखिम को कम करने के लिए पेन-पेपर मोड को खत्म कर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल पर स्विच करने का निर्देश देने की अपील की गई है, जिससे भौतिक रूप से पेपर के परिवहन (Chain-of-custody) के दौरान होने वाले रिस्क को खत्म किया जा सके।
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