School News: स्कूली शिक्षा में चंडीगढ़-पंजाब-दिल्ली अव्वल, मेघालय सबसे नीचे, मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट
Press Trust of India | June 19, 2025 | 10:41 AM IST | 2 mins read
एमओई की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों में ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, चंडीगढ़ और गोवा ने सबसे ज़्यादा सुधार दिखाया है।
नई दिल्ली: शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूली शिक्षा में चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, गुजरात और ओडिशा देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं। ये आंकड़े 'प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक' (पीजीआई) 2023-24 के आधार पर जारी किए गए हैं। रिपोर्ट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में केरल, दमन और दीव, हरियाणा, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान को भी शामिल किया गया है।
पीजीआई-डी जिलों में स्कूली शिक्षा की स्थिति का आकलन करने के लिए बनाया गया है। अब तक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पीजीआई रिपोर्ट जारी की है।
MOE Report: खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य
नवीनतम रिपोर्ट में मेघालय को सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया है। पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल औसत प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "पीजीआई की संकल्पना स्कूल शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के लिए की गई थी, जिसका उद्देश्य एक समान पैमाने पर सभी जिलों के सापेक्ष प्रदर्शन का आकलन करना है।"
‘पीजीआई-डी’ संरचना में 74 संकेतकों में 600 भारांक शामिल है, जिन्हें छह श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें परिणाम, बुनियादी ढांचा सुविधाएं, स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग और शासन प्रक्रिया शामिल हैं।
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पिछले दो सालों में इन राज्यों में सुधार
रिपोर्ट में प्रदर्शन श्रेणियों को 11 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। पिछले दो सालों में ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, चंडीगढ़ और गोवा ने सबसे ज़्यादा सुधार दिखाया है। वहीं छत्तीसगढ़, पंजाब और पश्चिम बंगाल के प्रदर्शन में गिरावट आई है।
दिल्ली ने एक साल में सबसे अधिक सुधार दिखाया, लेकिन डेटा की कमी के कारण दो साल की तुलना संभव नहीं हो पाई। फिर भी, कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश पीजीआई के शीर्ष चार ग्रेड - 'दक्ष', 'उत्कर्ष', 'उत्ति-उत्तम' या 'उत्तम' तक नहीं पहुंच सका।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अच्छी प्रगति के बावजूद अभी भी बहुत काम बाकी है। अगर भारत को नई शिक्षा नीति 2020 और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो नीतिगत प्रयास और बेहतर प्रशासन ज़रूरी होगा।
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