Santosh Kumar | March 26, 2026 | 11:04 AM IST | 2 mins read
शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश में इस समय लगभग 60 प्रतिशत हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े हुए हैं। अगले 2-3 साल में सभी हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ जाएंगे।

नई दिल्ली: राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत के सभी हाई स्कूल में अगले 2-3 वर्ष के भीतर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होगा। उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रधान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी प्रकार की शिक्षा को कृत्रिम मेधा (एआई) के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षकों को एआई ज्ञान प्रदान करने के लिए क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश में इस समय लगभग 60 प्रतिशत हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "अगले 2-3 साल में देश के सभी हाई स्कूल ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ जाएंगे।"
एआई पर मंत्री ने कहा कि देश इस तकनीक में सबसे आगे है। प्रधान ने कहा, "एआई ऐसा विषय है जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रयुक्त है। आज, जब हम एनईपी के नए पाठ्यक्रम को लागू कर रहे हैं..., एआई का प्राथमिक ज्ञान कक्षा 3 से होगा।"
उन्होंने कहा कि लगभग सभी मातृभाषाएं एआई से जुड़ी हुई हैं। प्रधान ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के महत्व और स्कूली पाठ्यक्रम में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है।"
सभी स्तरों पर छात्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण कौशल को विकसित करने के लिए प्रासंगिक चरणों में एआई, डिजाइन 'थिंकिंग' आदि जैसे समसामयिक विषयों की शुरूआत सहित ठोस पाठ्यचर्या और शैक्षणिक पहल की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि ग्यारहवीं कक्षा के कंप्यूटर विज्ञान और ग्यारहवीं कक्षा की सूचना विज्ञान प्रथाओं की मौजूदा एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में बात करती हैं।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने कई पहलें की हैं। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूली छात्रों में एआई-तत्परता विकसित करने के लिए पाठ्यक्रम विकसित किया है। यह पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 में कक्षा 3 से 8वीं तक लागू किया जाएगा।
विशेष रूप से वे स्कूल, जिनमें प्राथमिक स्तर पर 15 से कम और उच्च स्तर पर 25 से कम छात्र हैं। दूसरी ओर, यह चिंता भी जताई जा रही है कि इस कदम का ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
Santosh Kumar