Santosh Kumar | October 3, 2026 | 07:03 PM IST | 2 mins read
सफल उम्मीदवारों की लिस्ट और उनके स्कोरकार्ड देखने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल पोर्टल पर जाना होगा। होमपेज पर मौजूद संबंधित लिंक पर क्लिक करके और रजिस्ट्रेशन नंबर व जन्म तिथि डालकर नतीजे देखे जा सकते हैं।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर यूपी होम गार्ड भर्ती के लिए अंतिम परिणाम जारी कर दिए हैं। लिखित परीक्षा 25, 26 और 27 अप्रैल को राज्य भर के केंद्रों पर हुई, जिसमें बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल हुए। इसके बाद, चयनित उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। अब बोर्ड ने परीक्षा के अंतिम परिणाम जारी कर दिए हैं।
यह भर्ती प्रक्रिया राज्य भर में होम गार्ड के कुल 41,424 पदों के लिए आयोजित की गई। बोर्ड के अनुसार, कुल 1,07,221 उम्मीदवार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (डीवी) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (पीएसटी) के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए थे।
जिन उम्मीदवारों ने डॉक्यूमेंट्स की जांच और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट पास कर लिया, उनके लिए फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट बोर्ड के नोटिफिकेशन में बताए गए नियमों के अनुसार 15 से 26 सितंबर तक आयोजित किया गया।
सफल उम्मीदवारों की लिस्ट और उनके स्कोरकार्ड देखने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल पोर्टल पर जाना होगा। होमपेज पर मौजूद संबंधित लिंक पर क्लिक करके और रजिस्ट्रेशन नंबर व जन्म तिथि डालकर नतीजे देखे जा सकते हैं।
राज्य के 75 जिलों में कुल 41,424 रिक्त पदों के लिए 41,424 उम्मीदवारों को चुना गया है। 50 जिलों में अनुसूचित जाति श्रेणी के कुल 439 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। साथ ही, परीक्षा में कुल 8,290 महिला उम्मीदवार सफल रही हैं।
फाइनल रिजल्ट के बाद, सफल उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट और पुलिस कैरेक्टर वेरिफिकेशन किया जयेगा। मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन के चरणों में फिट पाए जाने वाले उम्मीदवारों को अपॉइंटमेंट लेटर जारी किए जाएंगे।
उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों के माध्यम से यूपी होमगार्ड का फाइनल रिजल्ट चेक या डाउनलोड कर सकते हैं-
यूपी होमगार्ड कटऑफ अंक 2026 श्रेणी वार जारी किए गए हैं। उम्मीदवार अपनी श्रेणी के अनुसार यूपी होमगार्ड कट ऑफ की जांच कर सकते हैं। इसके साथ ही यूपी होमगार्ड कटऑफ महिला और पुरुष के लिए अलग अलग जारी किए गए हैं।
उच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में कहा कि शिक्षा मित्रों की कानूनी स्थिति कार्यरत अध्यापकों से अलग है और संविधान राज्य सरकार को किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित भेद को समाप्त करने के लिए बाध्य नहीं करता।
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