Press Trust of India | October 3, 2026 | 10:36 AM IST | 1 min read
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत सभी अध्यापकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कार्यरत अध्यापकों के लिए आयोजित की जाने वाली विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2026 में शिक्षा मित्रों को शामिल करने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कहा कि याचिकाकर्ता शिक्षा मित्र सिर्फ इस आधार पर विशेष परीक्षा में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते कि वे सामान्य टीईटी में शामिल होने के पात्र हैं।
उच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में कहा कि शिक्षा मित्रों की कानूनी स्थिति कार्यरत अध्यापकों से अलग है और संविधान राज्य सरकार को किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित भेद को समाप्त करने के लिए बाध्य नहीं करता।
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत सभी अध्यापकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। सेवा में मौजूद ऐसे सभी अध्यापकों को, जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है, अगले एक वर्ष के भीतर विशेष टीईटी पास करना होगा।
ऐसा नहीं करने पर उनकी नौकरी जा सकती है। उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के अनुपालन में यूपी सरकार ने यूपीईएसएससी के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए विशेष टीईटी-2026 आयोजित करने का फैसला किया है।
शिक्षा मित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने की याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा, ''यह विशेष टीईटी उन मौजूदा अध्यापकों के लिए है जिनकी सेवा जारी रहना उच्चतम न्यायालय के बाध्यकारी निर्देशों के तहत टीईटी उत्तीर्ण करने पर निर्भर है।''