Press Trust of India | June 29, 2026 | 10:58 AM IST | 4 mins read
उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों को भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से बचाने के लिए 'टीचर्स गाइडलाइन-2026' जारी की है। इसके तहत शिक्षकों को हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान करने, प्राथमिक उपचार देने और स्कूलों में 'हीट एक्शन प्लान' लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है।

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के प्रकोप से बचाने के लिए 'टीचर्स गाइडलाइन-2026' जारी की है। इसके तहत शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित और जागरूक किया जाएगा ताकि वे हीटवेव के प्रभाव को कम कर सकें, छात्रों में हीट स्ट्रेस (गर्मी के तनाव) के लक्षणों की पहचान कर सकें और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्राथमिक उपचार दे सकें।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 'टीचर्स गाइडलाइन-2026 फॉर सेंसिटाइजिंग स्टूडेंट्स टुवर्ड्स हीट-रिलेटेड इलनेसेज' नाम से यह निर्देशिका जारी की गई है। इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के स्तर पर एक प्रभावी 'हीट एक्शन प्लान' लागू करना है, जिससे चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह महत्वपूर्ण गाइडलाइन बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशों के तहत तैयार की गई है। इस पहल का सीधा मकसद शिक्षकों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक मार्गदर्शन से लैस करना है। इससे शिक्षक न केवल हीट स्ट्रोक (लू लगना) और हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) के लक्षणों को समय रहते पहचान सकेंगे, बल्कि आपातकालीन स्थिति में बच्चों को सही प्राथमिक उपचार भी दे पाएंगे।
गाइडलाइन के मुताबिक, अब स्कूलों में छात्रों के बीच गर्मी से जनित बीमारियों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे स्कूल परिसर में ठंडे पानी की उपलब्धता, ओआरएस (ORS) घोल या नींबू पानी का इंतजाम रखें और बच्चों को सीधे धूप में जाने से बचने की सलाह दें। इस नई व्यवस्था से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को लू के खतरों से सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
1. प्रार्थना सभा और खेलकूद के लिए समय निर्धारित - गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों का समय सरकारी निर्देशों के तहत तय किया जाएगा। सुबह की प्रार्थना सभा, खेलकूद, शारीरिक शिक्षा (पीटी) और अन्य बाहरी गतिविधियां हर हाल में सुबह 10 बजे से पहले आयोजित की जाएंगी। मौसम विभाग द्वारा 'ऑरेंज' या 'रेड' अलर्ट जारी होने पर सभी भारी शारीरिक और बाहरी गतिविधियों को पूरी तरह से निलंबित रखा जाएगा।
2. क्लासरूम में जागरूक करेंगे शिक्षक - शिक्षक सुबह की सभा, क्लासरूम टीचिंग, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों और दैनिक दिनचर्या के माध्यम से छात्रों को लू से बचने के उपाय सिखाएंगे। बच्चों को पर्याप्त पानी पीने, सीधी धूप से बचने, हल्के और सूती कपड़े पहनने, पानी से भरपूर फल खाने और हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के बारे में शिक्षित किया जाएगा। बच्चों को यह भी सिखाया जाएगा कि यदि कोई सहपाठी बीमार पड़ता है, तो तुरंत शिक्षक को सूचित करें।
3. 'हेल्थ नोडल शिक्षक' की होगी तैनाती - गर्मी से जुड़ी गतिविधियों के समन्वय के लिए स्कूलों में 'हेल्थ नोडल शिक्षक' नामित किए जाएंगे। शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित होंगे। स्कूल परिसरों में प्रमुख स्थानों पर हीटवेव से बचाव के संदेश और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे।
4. फर्स्ट एड किट और ओआरएस की उपलब्धता - हर स्कूल में अनिवार्य रूप से फर्स्ट एड किट, ओआरएस (ORS), डिजिटल थर्मामीटर और 108 एम्बुलेंस सेवा सहित आवश्यक चिकित्सा संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
5. पानी और खान-पान को लेकर सख्त नियम - स्कूलों में साफ और सुरक्षित पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और छात्रों को हर 20 से 30 मिनट में पानी पीने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, चालू पंखे, वेंटिलेशन, छायादार क्षेत्र, पौधारोपण और जहाँ संभव हो, कूल रूफ (ठंडी छतें) और रिफ्लेक्टिव पेंट जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) को साफ और छायादार क्षेत्र में परोसने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी जैसे मौसमी फल खाने और कैफीनयुक्त, कार्बोनेटेड व अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों से बचने की सलाह दी गई है।
6. आपातकालीन स्थिति के लिए निर्देश (फर्स्ट एड) - यदि किसी छात्र में अत्यधिक पसीना आना, तेज प्यास, सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत छायादार जगह पर ले जाने, प्राथमिक उपचार देने, ठंडी पट्टियाँ लगाने और जरूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, दिव्यांगता या हाल ही में बुखार/डायरिया से पीड़ित बच्चों की विशेष निगरानी की जाएगी।
7. माता-पिता (अभिभावकों) से अपील - अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि बच्चे स्कूल जाने से पहले पर्याप्त पानी पी लें। बीमार बच्चों को स्कूल न भेजें और घर पर भी हीटवेव से सुरक्षा के उपाय अपनाएं।
8. रिकॉर्ड और मॉक ड्रिल - बयान में कहा गया है कि स्कूलों को हीटवेव से जुड़ी घटनाओं का रिकॉर्ड रखना होगा, नियमित समीक्षा करनी होगी, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी अलर्ट पर लगातार नजर रखनी होगी और समय-समय पर मॉक ड्रिल का आयोजन करना होगा।
उन्होंने कहा, "एक महीने का समय है, सभी सुरक्षा नियम पूरे कर लें। दिल्ली में चल रहे सभी कोचिंग संस्थान, चाहे उनकी संख्या 900 हो या 1000, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, असल बात तो वहां पढ़ने वाले बच्चों की ज़िंदगी और उनकी सुरक्षा है।"
Santosh Kumar