UP Government School Merger: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के विलय के खिलाफ विपक्ष ने किया प्रदर्शन
Press Trust of India | July 4, 2025 | 07:35 AM IST | 3 mins read
आप नेता संजय सिंह ने कहा कि 9 जुलाई से पार्टी 'मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए' के नारे के साथ 'स्कूल बचाओ' अभियान शुरू करेगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के विलय के खिलाफ बृहस्पतिवार को लखनऊ में प्रदर्शन किया। हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद स्कूलों के 'विलय' या उन्हें 'बंद' करना नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों की कम संख्या वाले संस्थानों में संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से उन्हें जोड़ने की कवायद है।
सरकार पर जनविरोधी फैसले लेने का आरोप -
राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में किए गए विरोध प्रदर्शन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर जनविरोधी फैसले लेने का आरोप लगाया। राय ने आरोप लगाया, “सरकार बच्चों की शिक्षा तक पहुंच में बाधा डालकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह गरीब बच्चों के स्कूलों को बंद कर रही है और पूंजीवादी हितों की सेवा करने वाली शराब की दुकानों को बढ़ावा दे रही है।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि राज्य भर के जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, “अगर तानाशाह सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती है तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन तेज करेगी।” आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भी राज्य सरकार के कदम की आलोचना की।
मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए -
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, “यह कोई विलय नहीं है। यह सीधे तौर पर स्कूलों को बंद करना है।” उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 26,000 सरकारी स्कूल पहले ही बंद हो चुके हैं और 27,000 अन्य को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। सिंह ने कहा कि 9 जुलाई से पार्टी 'मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए' के नारे के साथ 'स्कूल बचाओ' अभियान शुरू करेगी, प्रभावित गांवों का दौरा करेगी और लोगों को जागरूक करेगी।
स्कूल बचाओ अभियान -
उन्होंने कहा, “हम इस आंदोलन को हर गांव तक ले जाएंगे। हमारी पार्टी के जिला और फ्रंटल नेता इस अभियान में शामिल होंगे।” अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने 'पीटीआई वीडियो' से बात करते हुए कहा, “यह सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के अपने नारे के खिलाफ जा रही है। प्रदेश के 27,000 स्कूलों को बंद करना मुफ्त शिक्षा के वादे के साथ विश्वासघात है। यह बच्चों को सीखने के उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश है।''
लगभग 14 लाख बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा -
मौर्य ने दावा किया कि इस फैसले से लगभग 14 लाख बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा और 2.5 लाख शिक्षकों, रसोइयों और अन्य स्कूल कर्मचारियों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। इस बीच, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने विपक्ष की आलोचना को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “विपक्ष नकारात्मक मानसिकता से बात कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आगे बढ़ रही है।”
गरीब किसानों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाना -
राजभर ने कहा कि सरकार शिक्षा को प्रौद्योगिकी से जोड़ने के लिए काम कर रही है और गरीब किसानों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “सरकार के निर्देशों के अनुसार ऐसे विद्यालयों को पास के स्कूलों के साथ जोड़ा जा रहा है जहां बच्चों की संख्या बहुत कम यानी पांच, 10 या 15 है। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।”
उन्होंने कहा कि यह काम अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ बैठक करने के बाद ही किया जा रहा है। अब तक जिले में 41 ऐसे स्कूलों का विलय किया जा चुका है और नए स्कूलों में बेहतर शिक्षण परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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