Supreme Court on UGC: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 पर लगाई रोक, सीजीआई बोले- समाज में होगा विभाजन
Press Trust of India | January 29, 2026 | 02:48 PM IST | 2 mins read
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए।
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियम पर रोक लगा दी। यह रोक कई याचिकाओं के बाद लगाई गई। इन विनियमों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि इनमें 'सामान्य श्रेणी' के छात्रों को शिकायत निवारण तंत्र के अंतर्गत शिकायत करने से वंचित रखा गया है।
गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि यदि न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और समाज में विभाजन पैदा होगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को "समानता समितियां" गठित करने के अनिवार्य नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 में यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए।
रेगुलेशन की भाषा अस्पष्ट-एससी
न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया हम कहते हैं कि रेगुलेशन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने की आवश्यकता है ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
इस प्रकार, न्यायालय ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और विनियमों को स्थगित रखने का आदेश दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि 19 मार्च को जवाब देने योग्य नोटिस जारी करें।
तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ 2026 के विनियमों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली तीन रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, अधिवक्ता विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर की गई हैं।
19 मार्च को नोटिस का जवाब
न्यायालय ने इन याचिकाओं पर केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब 19 मार्च को देना है। तब तक 2026 के विनियमों को स्थगित रखा गया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि इस बीच 2012 के यूजीसी विनियम लागू रहेंगे।
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