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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से अभिभावकों को अपार आईडी डेटा शेयरिंग से ऑप्ट-आउट का विकल्प देने को कहा

Press Trust of India | July 21, 2026 | 08:33 AM IST | 4 mins read

शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने ओडिशा उच्च न्यायालय के दिसंबर, 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए वह सीबीएसई को इस फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगी।

पीठ ने कहा, ''हम सीबीएसई को यह फैसला पूरे देश में लागू करने का निर्देश देंगे। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)
पीठ ने कहा, ''हम सीबीएसई को यह फैसला पूरे देश में लागू करने का निर्देश देंगे। (प्रतीकात्मक-विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को ओडिशा उच्च न्यायालय के उस निर्देश को पूरे देश में लागू करने का आदेश देगा, जिसमें 'ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी जारी करने के लिए सहमति-पत्र में अभिभावकों को सहमति देने से इनकार करने या इस योजना से बाहर रहने का विकल्प देने का प्रावधान करने को कहा गया है।

अपार स्कीम के तहत छात्रों को 12 अंकों की पहचान संख्या दी जाती है। यह शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटल भंडार के तौर पर काम करता है, जिसमें अंकपत्र, डिग्री और पाठ्यक्रम से जुड़ी उपलब्धियां एक स्थान पर सुरक्षित रखी जाती हैं।

उच्चतम न्यायालय की पीठ 4 छात्रों के अभिभावकों की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी योजना की वैधता को चुनौती दी गई है कि यह उन्हें आधार पहचानपत्र प्राप्त करने के लिए बाध्य करती है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर, 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए वह सीबीएसई को इस फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगी।

CBSE APAAR ID: सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्या कहा?

पीठ ने कहा, ''हम सीबीएसई को यह फैसला पूरे देश में लागू करने का निर्देश देंगे, क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश को स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही, सीबीएसई से इन मुद्दों पर भी गौर करने को कहा जाएगा।''

पीठ ने कहा कि औपचारिक आदेश बाद में जारी किया जाएगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह सीबीएसई को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई सहमति और डेटा संरक्षण से जुड़ी चिंताओं के समाधान करने का निर्देश देगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि 'अपार' योजना को वैकल्पिक बताया गया है, लेकिन इसे आधार से जोड़ा गया है, ऐसे में 'अपार' आईडी लेने के लिए पहले आधार बनवाना लगभग अनिवार्य हो जाता है।

उन्होंने ''के.एस. पुट्टास्वामी'' मामले में 2019 के आधार संबंधी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को आधार बनवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा परीक्षा में बैठने के लिए 'अपार' को जरूरी बनाना उसी सिद्धांत का उल्लंघन है।

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याचिकाकर्ता के वकील की दलील का समर्थन

जयसिंह ने कहा कि योजना का क्रियान्वयन डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023, के अनुरूप नहीं है, खासकर सूचित सहमति, सहमति वापस लेने और विद्यार्थियों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के मामले में।

जयसिंह ने कहा कि मौजूदा सहमति-पत्र एक सामान्य अनुबंध जैसा है, जिसमें अभिभावकों को सहमति देने से इनकार करने या पंजीकरण से पहले ही योजना से बाहर रहने का कोई वास्तविक विकल्प नहीं दिया गया है।

उन्होंने बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रखने को लेकर भी चिंता जतायी और कहा कि व्यक्तियों को "राइट टू बी फॉरगॉटन" (रिकॉर्ड से नाम हटवाने का अधिकार) और अपनी सहमति वापस लेने का अधिकार होना चाहिए।

न्यायाधीश ने कहा, "देश में हर चीज को संदेह से नहीं देखना चाहिए। यह पहचान संख्या शिक्षा प्राधिकारियों को छात्रों का सही रिकॉर्ड रखने, पाठ्यक्रम लागू करने और शिक्षक-छात्र अनुपात जैसे मानकों की निगरानी करने में मदद करेगी।"

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'शिक्षा को आधार से नहीं जोड़ा जा सकता'

जयसिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य उचित हो सकता है, लेकिन उसे वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता जैसे संवैधानिक मानकों पर भी खरा उतरना होगा। पीठ ने कहा कि सीबीएसई लागू कानूनी व्यवस्था का अतिक्रमण नहीं कर सकते।

याचिकाकर्ताओं ने ओडिशा उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को अभिभावकों को 'अपार' के लिए सहमति देने से इनकार करने और योजना से बाहर रहने का स्पष्ट विकल्प देने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि 'अपार' योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है। इससे निजता के मौलिक अधिकार को लेकर भी उचित चिंताएं पैदा होती हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी दोहराया था कि शिक्षा को आधार से नहीं जोड़ा जा सकता।

उसने कहा था कि बाद में सहमति वापस लेने का अधिकार, शुरुआत में सहमति देने से इनकार करने के अधिकार का विकल्प नहीं हो सकता। अभिषेक बक्सी ने दायर याचिका में 'अपार' योजना को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया है।

याचिका में कहा गया है कि आधार से जुड़ी शैक्षणिक पहचान प्रणाली और उससे संबंधित डेटा प्रसंस्करण व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21(ए) का उल्लंघन करती है तथा केंद्र सरकार की कार्यपालिका शक्तियों की सीमा से परे है।

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