Santosh Kumar | October 14, 2026 | 08:40 AM IST | 1 min read
संगठनों ने कहा कि श्रमिक, किसान, छात्र, युवा और वंचित समुदाय दशकों से जंतर-मंतर पर न्याय, जवाबदेही, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक समानता की मांग को लेकर जुटते रहे हैं।

नई दिल्ली: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने की निंदा की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के संवैधानिक अधिकार के लिए झटका बताया। दोनों संगठनों ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वे छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों को लामबंद कर जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल कराने के लिए अभियान चलाएंगे। उन्होंने जंतर-मंतर को जनता के संघर्षों और लोकतांत्रिक प्रतिरोध का ऐतिहासिक प्रतीक बताया।
संगठनों ने कहा कि श्रमिक, किसान, छात्र, युवा और वंचित समुदाय दशकों से जंतर-मंतर पर न्याय, जवाबदेही, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक समानता की मांग को लेकर जुटते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियां लोकतांत्रिक असहमति के लिए उपलब्ध जगह को सीमित कर सकती हैं।
वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ मुकदमा शुरू होने तक कथित वोट चोरी के खिलाफ अपना अभियान तेज करने का भी संकल्प लिया।
इस संयुक्त बयान पर डीवाईएफआई के अध्यक्ष ए. ए. रहीम, एसएफआई के अध्यक्ष आदर्श एम. साजी, डीवाईएफआई के महासचिव हिमघ्नराज भट्टाचार्य और एसएफआई के महासचिव सृजन भट्टाचार्य के हस्ताक्षर थे।
डीयू ईसी द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार, ढाका कॉम्प्लेक्स में हॉस्टल निर्माण के अलावा रोशनपुरा (नजफगढ़) में वीर सावरकर कॉलेज में भी लड़कियों और लड़कों के लिए हॉस्टल निर्माण किया जाना है।
Abhay Pratap Singh