Press Trust of India | July 23, 2026 | 07:00 PM IST | 2 mins read
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में कहा कि नीट पर चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले पर संसद में चर्चा को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध के बीच कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने के दौरान कोई भी बहस बेनतीजा होगी। कांग्रेस ने कहा कि राष्ट्रव्यापी भावना को देखते हुए प्रधान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
इससे पहले, मुख्य विपक्षी दल ने प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में कहा कि नीट पर चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खरगे समेत कांग्रेस नेताओं और अन्य सांसदों ने भी संसद परिसर के भीतर अपनी मांग के समर्थन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की वजह से 2015 का मानसून सत्र बेकार चला गया था, क्योंकि उस समय संबंधित मुख्यमंत्री को बचाया गया था और अब नीट पेपर लीक मामले के लिए जिम्मेदार मंत्री को भी बचाया जा रहा है। वह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जिक्र कर रहे थे, जो 2015 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “समय कितना आगे बढ़ गया, लेकिन कुछ भी नहीं बदला! 2015 का मानसून सत्र मध्य प्रदेश के व्यापम परीक्षा एवं भर्ती घोटाले की वजह से लगभग पूरी तरह ठप हो गया था।” रमेश ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के पद पर रहते हुए संसद में होने वाली कोई भी चर्चा निरर्थक होगी।
उन्होंने कहा, “2026 का मानसून सत्र एनटीए पेपर लीक घोटाले की भेंट चढ़ गया है। व्यापम घोटाले के दौरान जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को बचाया गया और बाद में उन्हें केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। एनटीए पेपर लीक के दौरान जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को भी आज प्रधानमंत्री का संरक्षण प्राप्त है।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “देशभर की भावना और मांग बिल्कुल स्पष्ट है-मंत्री प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।” कांग्रेस ने नीट पर्चा लीक मामले पर चर्चा शुरू करने से पहले प्रधान के इस्तीफे की शर्त रखी है, लेकिन सरकार विपक्षी पार्टी पर पहले से शर्तें थोपने और चर्चा में हिस्सा न लेने का आरोप लगा रही है। सरकार ने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया है।