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महाराष्ट्र सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मुसलमानों के लिए निर्धारित 5 प्रतिशत आरक्षण किया रद्द

Press Trust of India | February 18, 2026 | 12:33 PM IST | 1 min read

नए आदेश में कहा गया है कि सरकार ने 2014 से पूर्व के निर्णयों एवं परिपत्रों को रद्द कर दिया है और विशेष पिछड़ा वर्ग के मुसलमानों को जाति और गैर-'क्रीमी लेयर' प्रमाण पत्र जारी करना बंद कर दिया है।

पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछले अध्यादेश की अवधि समाप्त हो गई है। (इमेज-फ्रीपिक)
पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछले अध्यादेश की अवधि समाप्त हो गई है। (इमेज-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को दिए जाने वाले 5 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया है। इस संबंध में 17 फरवरी को एक शासकीय आदेश (जीआर) जारी किया गया।

पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछले अध्यादेश की अवधि समाप्त हो गई है और उस निर्णय पर अदालत द्वारा अंतरिम रोक लगा दी गई है।

राज्य में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की पिछली सरकार ने मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।

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नए आदेश के अनुसार, विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।

नए आदेश में कहा गया है कि सरकार ने 2014 से पूर्व के निर्णयों एवं परिपत्रों को रद्द कर दिया है और विशेष पिछड़ा वर्ग के मुसलमानों को जाति और गैर-'क्रीमी लेयर' प्रमाण पत्र जारी करना बंद कर दिया है।

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