MP School: अवैध वसूली पर डीओई की कार्रवाई, 10 स्कूलों को 65 करोड़ रुपये की फीस लौटाने का निर्देश

Press Trust of India | July 11, 2024 | 04:32 PM IST | 2 mins read

अधिकारियों ने बताया कि 27 मई को जबलपुर जिला प्रशासन ने कुछ स्कूल प्राधिकारियों और किताब दुकान मालिकों के खिलाफ अवैध रूप से फीस और पाठ्यपुस्तकों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के आरोप में 11 एफआईआर दर्ज की थीं।

स्कूलों ने 2018-19 से 2024-25 के बीच 81,117 छात्रों से 64.58 करोड़ रुपये वसूले हैं। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के अधिकारियों ने 10 निजी स्कूलों को 7 शैक्षणिक सत्रों में 81,000 से अधिक छात्रों से ट्यूशन फीस के रूप में एकत्र किए गए लगभग 65 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) घनश्याम सोनी ने कहा कि स्कूलों ने कानून का उल्लंघन करते हुए ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी की है।

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस एवं संबंधित मामलों का विनियमन) अधिनियम, 2017 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति ने इन विद्यालयों के खातों की जांच की और पाया कि ये विद्यालय छात्रों से अतिरिक्त फीस वसूल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने इन स्कूलों द्वारा फीस में अवैध वृद्धि का पता लगाया है। इन स्कूलों ने 2018-19 से 2024-25 के बीच 81,117 छात्रों से 64.58 करोड़ रुपये वसूले हैं। सोनी ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने मंगलवार को स्कूलों को नोटिस जारी कर उन्हें अवैध रूप से एकत्र की गई फीस वापस करने का निर्देश दिया।

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अधिकारियों ने बताया कि 27 मई को जबलपुर जिला प्रशासन ने स्कूल अधिकारियों और कुछ किताब दुकान मालिकों के खिलाफ कथित रूप से अवैध रूप से फीस और पाठ्यपुस्तकों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के आरोप में 11 एफआईआर दर्ज की थीं।

जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना के अनुसार, विसंगतियां पाए जाने के बाद स्कूल अधिकारियों और पाठ्यपुस्तक दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई। नियमों के अनुसार, यदि कोई स्कूल 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने का इरादा रखता है, तो उसे जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी होती है।

एक अधिकारी ने कहा कि अगर प्रस्तावित बढ़ोतरी 15 प्रतिशत से अधिक है, तो स्कूल को राज्य सरकार द्वारा गठित समिति से मंजूरी लेनी होगी। कलेक्टर ने कहा कि इनमें से कुछ स्कूलों ने उचित अधिकारियों से मंजूरी लिए बिना 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ा दी, जबकि अन्य ने 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई।

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