DUSU President ने प्रिंसिपल ऑफिस की दीवार पर पोता गोबर, कहा- रिसर्च करनी है तो अपने घर पर करो
Press Trust of India | April 15, 2025 | 06:43 PM IST | 2 mins read
रौनक खत्री ने कहा कि वह और उनके दोस्त प्रिंसिपल की "मदद" करने गए थे। उन्होंने लिखा, "उन्हें यकीन है कि अब मैडम एसी हटाकर छात्रों को दे देंगी और गोबर से कॉलेज में ठंडा माहौल बनाएंगी।"
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के अध्यक्ष रौनक खत्री ने मंगलवार (15 अप्रैल) को लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्रिंसिपल के दफ़्तर की दीवारों पर गाय का गोबर पोत दिया। इस घटना ने कॉलेज परिसर में विवाद को हवा दे दी है। इससे पहले कॉलेज की प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह कक्षा की दीवारों पर गाय का गोबर लगाती नजर आ रही थीं। उनका दावा था कि इससे कक्षाएं ठंडी रहती हैं।
खत्री ने प्रिंसिपल के कार्यालय के अंदर एक संकाय सदस्य के साथ बहस करते हुए पीटीआई को बताया, "इस तरह की पहल के लिए छात्रों से कोई सहमति नहीं ली गई थी। यदि आप शोध करना चाहते हैं, तो इसे अपने घर पर करें।"
प्रिंसिपल वत्सला ने 13 अप्रैल को न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया था कि संकाय के नेतृत्व वाली यह पहल स्वदेशी और टिकाऊ शीतलन प्रौद्योगिकियों की खोज के उद्देश्य से चल रही एक शोध परियोजना का हिस्सा है।
'एसी हटाकर छात्रों को दें दें मैडम'
फिलहाल मंगलवार की घटना पर दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस बीच, डूसू अध्यक्ष रौनक खत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर प्रिंसिपल के वायरल वीडियो का जिक्र किया।
रौनक खत्री ने कहा कि वह और उसके दोस्त प्रिंसिपल की "मदद" करने गए थे और इसलिए दीवारों पर गोबर पोत दिया। उन्होंने लिखा, "उन्हें यकीन है कि अब मैडम एसी हटाकर छात्रों को देंगी और गोबर से कॉलेज में ठंडा माहौल बनाएंगी।"
प्रिंसिपल ने दी वायरल वीडियो पर सफाई
प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला ने 13 अप्रैल को वायरल वीडियो पर सफाई दी। उन्होंने कहा, "यह काम अभी चल रहा है। एक हफ्ते बाद मैं पूरी रिसर्च शेयर करूंगा। प्राकृतिक मिट्टी से कोई नुकसान नहीं होता। कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के गलत बातें फैला रहे हैं।"
उन्होंने खुद यह वीडियो कॉलेज के शिक्षकों के वॉट्सऐप ग्रुप में भेजा, जिसमें बताया गया था कि सी ब्लॉक की कक्षाओं को ठंडा रखने के लिए स्थानीय तरीका अपनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह तरीका गर्मी से निपटने के लिए शोध का हिस्सा है।
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