Jharkhand News: झारखंड के स्कूलों में बांग्ला भाषा के शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन
Press Trust of India | May 15, 2025 | 08:22 AM IST | 1 min read
पूर्वी सिंहभूम इकाई के महासचिव ने राज्य में बंगाली भाषी छात्रों के बारे में कथित भ्रामक टिप्पणी के लिए शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन की आलोचना की।
झारखंड: झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति ने बुधवार को पूर्वी सिंहभूम जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष धरना दिया और राज्य के स्कूलों में बांग्ला भाषा के शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की कथित कमी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। झारखंड के बंगाली समुदाय के 100 से अधिक संगठनों की केंद्रीय समिति के कार्यकर्ताओं ने रांची में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित एक ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि स्कूलों में बंगाली पढ़ाई जाए और भाषा की पर्याप्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं।
शिक्षा मंत्री के बयान की हुई आलोचना
समिति की पूर्वी सिंहभूम इकाई के महासचिव जूरन मुखर्जी ने राज्य में बंगाली भाषी छात्रों के बारे में कथित भ्रामक टिप्पणी के लिए शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन की आलोचना की। समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में शिक्षा मंत्री से मुलाकात की।
उन्होंने मंत्री को झारखंड में बंगाली भाषा के छात्रों की समस्या के बारे में बताया। जुरन मुखर्जी ने कहा कि सोरेन ने कहा था कि वहां बंगाली छात्र नहीं हैं और अगर हैं तो ऐसे छात्रों को स्कूल में लाएं। फिर सरकार उन्हें शिक्षक और किताबें मुहैया कराएगी।
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बयान में कहा गया है, "यह पूरी तरह से झूठ और भ्रामक है। उनकी टिप्पणी से समाज में व्यापक विरोध हुआ है।" मुखर्जी ने दावा किया कि राज्य के 24 जिलों में से 16 जिले मुख्य रूप से बंगाली भाषी हैं जबकि हर स्कूल में बंगाली भाषी छात्र हैं।
समिति ने आरोप लगाया कि ढाई दशक पहले अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही बंगाली भाषा को हाशिए पर धकेलने की जानबूझकर साजिश रची जा रही है। बता दें कि झारखंड राज्य का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था।
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