RMAF: लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली भारतीय संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ को मिला रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार

Press Trust of India | August 31, 2025 | 05:35 PM IST | 2 mins read

रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार प्राप्त करने वाला ‘फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली’ पहला भारतीय संगठन बना है।

रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार फाउंडेशन (RMAF) ने आज यानी 31 अगस्त, 2025 को इसकी घोषणा की है। (स्त्रोत-आधिकारिक एक्स/@MagsaysayAward)
रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार फाउंडेशन (RMAF) ने आज यानी 31 अगस्त, 2025 को इसकी घोषणा की है। (स्त्रोत-आधिकारिक एक्स/@MagsaysayAward)

नई दिल्ली: दूरदराज के गांवों में स्कूल न जाने वाली लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली एक भारतीय गैर-लाभकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ को 2025 के रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार विजेताओं में शामिल किया गया है। रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार फाउंडेशन (RMAF) ने आज यानी 31 अगस्त, 2025 को इसकी घोषणा की है।

आरएमएएफ की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ‘फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली’, जिसे व्यापक रूप से 'एजुकेट गर्ल्स' के नाम से जाना जाता है, ने रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार प्राप्त करने वाला पहला भारतीय संगठन बनकर इतिहास रच दिया है।

एशिया का नोबेल माना जाने वाला रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार, एशिया के लोगों की निस्वार्थ सेवा में दिखाई गई महान भावना को मान्यता देता है। अन्य दो विजेताओं में मालदीव की शाहिना अली को उनके पर्यावरण संबंधी कार्यों के लिए और फिलीपीन के फ्लेवियानो एंटोनियो एल विलानुएवा को उनके योगदान के लिए चुना गया है।

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बयान में कहा गया कि, 2025 के रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार विजेताओं को फिलीपीन के पूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सायसाय की फोटो वाला एक पदक, प्रशस्ति पत्र के साथ एक प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार दिया जाएगा। मनीला के मेट्रोपोलिटन थिएटर में 67वां रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार समारोह सात नवंबर को आयोजित किया जाएगा।

आरएमएएफ के बयान में कहा गया है कि “लड़कियों और युवा महिलाओं की शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक रूढ़िवादिता को दूर करने, उन्हें निरक्षरता के बंधन से मुक्त करने और उनके दक्षता विकास, साहस, ज़ज्बा बढ़ाने की प्रतिबद्धता के लिए” 'एजुकेट गर्ल्स' को यह पुरस्कार दिया जा रहा है।

Ramon Magsaysay Award 2025: फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली

‘एजुकेट गर्ल्स’ की स्थापना 2007 में ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ की स्नातक सफीना हुसैन द्वारा की गई थी, जो उस समय सैन फ्रांसिस्को में कार्यरत थीं। उन्होंने महिला निरक्षरता की चुनौती का सामना करने के लिए भारत लौटने का निर्णय लिया।

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