आईआईएम लखनऊ और आईआईटी कानपुर मिलकर शुरू करेंगे हेल्थकेयर मैनेजमेंट में पीजी प्रोग्राम
Santosh Kumar | September 23, 2024 | 01:58 PM IST | 2 mins read
यह कार्यक्रम सार्वजनिक अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों सहित विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों को सेवाएं प्रदान करेगा।
नई दिल्ली: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन में संयुक्त स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य प्रबंधन सिद्धांतों को उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर स्वास्थ्य सेवा उद्योग में नेतृत्व की आवश्यकता को पूरा करना है।
हेल्थकेयर मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों को सेवाएं प्रदान करेगा, जिसमें सार्वजनिक अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा कर्मी और डॉक्टर शामिल हैं। पाठ्यक्रम को चिकित्सा प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता को व्यवसाय प्रशासन के साथ मिश्रित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस कार्यक्रम में आईआईएम लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर क्षितिज अवस्थी और असिस्टेंट प्रोफेसर गिरीश बालासुब्रमण्यम शामिल हुए। वहीं आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधित्व एसोसिएट डीन प्रोफेसर जयंधरन जी राव और गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख संदीप वर्मा ने किया।
आईआईएम लखनऊ की निदेशक अर्चना शुक्ला और आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने वरिष्ठ संकाय सदस्यों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए। आईआईएम लखनऊ की निदेशक प्रोफेसर अर्चना शुक्ला ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
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दोनों संस्थानों के निदेशकों ने क्या कहा?
अर्चना शुक्ला ने कहा, "हम आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी करके एक ऐसा कार्यक्रम लाने के लिए उत्साहित हैं जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए प्रबंधन और प्रौद्योगिकी को जोड़ता है। यह कार्यक्रम नए समाधान प्रदान करेगा जो भारत और दुनिया में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन को बेहतर बना सकता है।"
आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने कहा, "आईआईएम लखनऊ के साथ सहयोग हमारे मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हम स्वास्थ्य सेवा चुनौतियों को हल करने के लिए स्नातकों को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगे।"
आईआईएम लखनऊ को उम्मीद है कि यह साझेदारी स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन शिक्षा और अनुसंधान को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे भारत में एक मजबूत, अधिक अभिनव स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में योगदान देने में सक्षम पेशेवरों को विकसित करने में मदद मिलेगी।
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