Gujarat High Court News: गुजरात शिक्षा अधिनियम में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कीं
Press Trust of India | January 23, 2025 | 04:10 PM IST | 1 min read
गुजरात शिक्षा अधिनियम राज्य सरकार को निजी स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है।
गुजरात: गुजरात उच्च न्यायालय ने आज (23 जनवरी) अल्पसंख्यक संस्थानों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम में 2021 में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई थी, जो राज्य सरकार को निजी स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि यह संशोधन धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान चलाने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा, "सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।"
हालांकि, अभी कोर्ट का पूरा फैसला आना बाकी है। नए कानून के तहत राज्य शिक्षा बोर्ड को निजी स्कूलों के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती के लिए योग्यता और चयन प्रक्रिया तय करने का अधिकार दिया गया है।
संशोधन त्रुटिपूर्ण और अवैध: याचिकाकर्ता
अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित स्कूलों ने याचिका दायर कर कहा कि यह संशोधन "गलत और अवैध" है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य ने नियमों के नाम पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन किया है।
उन्होंने दावा किया कि यह संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का उल्लंघन करता है। राज्य सरकार ने संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
संशोधित कानून शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और सेवा समाप्ति के नियम तय करता है। यह सरकार से सहायता पाने वाले निजी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के चयन की अनुमति भी देता है।
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