Delhi University: पिछले पांच वर्षों में विद्यार्थियों की फीस से होने वाली डीयू की आय दोगुनी हुई
Press Trust of India | October 22, 2024 | 07:57 AM IST | 2 mins read
वर्ष 2019-20 में डीयू की आयु लगभग 100 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का विद्यार्थियों की फीस से होने वाला राजस्व संग्रह पिछले पांच वर्षों में बढ़कर दोगुना से अधिक हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक डीयू को पिछले वित्त वर्ष में विद्यार्थियों की फीस से 200 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई थी।
डीयू के वित्त विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, विश्वविद्यालय की आंतरिक प्राप्तियां (फंड इनफ्लो), जिसमें मुख्य रूप से छात्रों की फीस शामिल है, 2019-20 में लगभग 100 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से डीयू को मिलने वाले अनुदान में निरपेक्ष रूप से वृद्धि हुई है, लेकिन कुल निधि प्रवाह (प्राप्तियों) में यूजीसी अनुदान की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2019-2020 में डीयू को यूजीसी से लगभग 600 करोड़ रुपये और 2023-2024 में 800 करोड़ रुपये से थोड़ी कम धनराशि प्राप्त हुई थी।
डीयू में वाणिज्य के एक प्रोफेसर ने कहा कि यूजीसी से मिलने वाला अनुदान 2019-20 और 2023-24 के बीच लगभग 83 प्रतिशत से घटकर 77 प्रतिशत हो गया है, जो यह दर्शाता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के संचालन में सार्वजनिक वित्त पोषण की भूमिका घट रही है।
प्रोफेसर ने कहा, ‘‘ इसके अलावा, कुल प्राप्तियों का परिमाण अब दिल्ली विश्वविद्यालय के कुल व्यय से अधिक है और यह प्रवृत्ति पिछले दो वर्षों में सामने आई है। यह दर्शाता है कि कुल प्राप्तियों में से धनराशि का कम उपयोग हुआ है। ’’
विश्वविद्यालय के अधिकारियों की ओर से इन आंकड़ों को लेकर अब तक तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। डीयू ने जुलाई में अपने सभी डिग्री पाठ्यक्रमों में फीस वृद्धि लागू की थी, जिसमें पीएचडी पाठ्यक्रमों में 60 प्रतिशत की वृद्धि भी शामिल थी। पिछले वर्ष दिसंबर में डीयू ने अपने वार्षिक शुल्क में 46 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जो एक वर्ष के भीतर दूसरी वृद्धि थी।
विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसरों ने आरोप लगाया है कि यह छात्रों की जेब से उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (एचईएफए) ऋण पर ब्याज वसूलने का एक प्रयास था। एचईएफए केनरा बैंक और शिक्षा मंत्रालय का एक संयुक्त उद्यम है, जो भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षिक बुनियादी ढांचे और अनुसंधान सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
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