Sahkarita Vishwavidyalaya: सहकारिता विश्वविद्यालय में वर्गीज कुरियन का नाम शामिल करने की विपक्ष ने की मांग
Press Trust of India | April 2, 2025 | 10:57 AM IST | 3 mins read
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य सभा में ‘त्रिभुवन’ सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 पेश किया गया।
नई दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार (1 अप्रैल) को विपक्ष के सदस्यों ने प्रस्तावित सहकारिता विश्वविद्यालय में श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन का नाम शामिल करने की मांग की तथा आरोप लगाया कि राज्यों के सहकारिता तंत्र में केंद्र हस्तक्षेप कर रहा है। उच्च सदन में त्रिभुवन सहकारी विश्विद्यालय विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस विधेयक के जरिए सहकारिता को कामगारों एवं किसानों से लेकर उद्योगपतियों को सौंपने की एक ‘साजिश’ करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के जरिए सहकारिता का निगमीकरण किया जा रहा है। सहकारिता मंत्रालय एवं सहकारी आंदोलन को कामगारों एवं किसानों के हाथों से लेकर उद्योगपतियों को दिया जा रहा है।’’ उन्होंने सुझाव दिया कि सहकारी समितियों में हर पांच वर्ष में चुनाव कराए जाए चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा की ‘डबल इंजन’ की सरकार हैं, वहां सहकारी समितियों में चुनाव नहीं कराए जा रहे।
त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025:
दिग्विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी एवं ग्वालियर जैसे क्षेत्रों में सहकारी बैंकों की संलिप्तता में ‘घोटाले’ हो रहे हैं। चर्चा में भाग लेते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वी शिवदासन ने कहा कि कुरियन का देश के सहकारिता क्षेत्र, विशेषकर गुजरात, में व्यापक योगदान है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार उनकी (कुरियन की) अनदेखी कर रही है। मेरा सुझाव है कि विश्वविद्यालय का नाम त्रिभुवन कुरियन विश्वविद्यालय होना चाहिए।’’ त्रिभुवनदास किशिभाई पटेल आजादी के पहले से देश में सहकारिता आंदोलन में सक्रिय थे और उन्हें इसके लिए महात्मा गांधी एवं सरदार पटेल से प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता था।
सहकारिता विश्वविद्यालय:
शिवदासन ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथियों द्वारा केरल में सहकारिता क्षेत्र के बैंकों के बारे में एक नकारात्मक प्रचार चलाया जा रहा है, ताकि निजी एवं कार्पोरेट बैंकों के लिए रास्ता साफ हो सके। उन्होंने कहा, ‘‘सहकारिता क्षेत्र राज्य सूची में आता है, किंतु केंद्र सरकार राज्य के अधिकार हथियाने का प्रयास कर रही है। इसीलिए वे गलत मंशा के साथ इस क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं।’’
आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सहकारिता विश्वविद्यालय परिसर उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों में स्थापित किए जाने चाहिए। तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि कुरियन की मृत्यु के छह वर्ष बाद गुजरात में भाजपा ने उन पर अमूल के लाभ को मिशनरियों को धर्मान्तरण के लिए दान करने का आक्षेप लगाया।
त्रिभुवन कुरियन विश्वविद्यालय:
उन्होंने कहा कि कुरियन ने आईआईएम, अहमदाबाद से इस्तीफा दे दिया था और ग्रामीण प्रबंधन की परिकल्पना को जन्म दिया, जिसके चलते ग्रामीण प्रबंधन संस्थान की स्थापना हुई। कांग्रेस के जी सी चंद्रशेखर ने कहा कि महाराष्ट्र एवं केरल के कई विश्वविद्यालय पहले से ही सहकारिता पाठ्यक्रम चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि नया विश्वविद्यालय खोलने के स्थान पर पहले से मौजूद पाठ्यक्रमों को बेहतर बनाया जाना चाहिए था।
घोष ने कहा, ‘‘इस सरकार में डॉ कुरियन जैसे महान नेहरूवादी राष्ट्र निर्माताओं को लेकर एक नफरत रही है, किंतु नेहरूवादी राष्ट्र निर्माताओं के प्रति यह नफरत एवं उग्रता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। डॉ कुरियन ने गुजरात का गौरवशाली पुत्र होने के नाते ग्रामीण प्रबंधन संस्थान की स्थापना की और उनका नाम इस विश्वविद्यालय में होना चाहिए। वे इतिहास का पुनर्लेखन का प्रयास कर रहे हैं किंतु जो लोग इतिहास फिर से लिखने का प्रयास करते हैं इतिहास उन्हें क्षमा नहीं करता।’’
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