Abhay Pratap Singh | April 29, 2026 | 05:14 PM IST | 2 mins read
इस पहल का उद्देश्य एक सहायक, समावेशी और सहयोगी शैक्षिक माहौल तैयार करना है, जो प्रत्येक छात्र के विकास, बेहतर स्वास्थ्य और चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बढ़ावा दे।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आज शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘पेरेंटिंग कैलेंडर’ जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य अभिभावकों और स्कूलों के बीच साझेदारी को मजबूत करना तथा छात्रों के विकास को बढ़ावा देना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में शुरू की थी।
इनमें समावेशन (Inclusion) पर विशेष भाग शामिल है, जो विविध पृष्ठभूमि के शिक्षार्थियों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और समान अवसरों को बढ़ावा देता है। वहीं ‘परिवर्तनों के साथ सामंजस्य’ (Coping with Changes) पर केंद्रित सेक्शन अभिभावकों और छात्रों को पाठ्यक्रम में बदलाव तथा बदलती शैक्षणिक अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालने में सहायता करता है।
इसके अलावा, पेरेंटिंग वर्कशॉप्स से जुड़े खंड को विकासात्मक दृष्टिकोण को शामिल करते हुए और अधिक सशक्त बनाया गया है, जिससे स्कूल आयु-उपयुक्त और संदर्भ के अनुरूप सहभागिता कार्यक्रम तैयार कर सकें।
यह कैलेंडर अभिभावक एवं बच्चों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने, घर व स्कूल के बीच साझेदारी को मजबूत करने तथा अभिभावकों को अपने बच्चे के विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य एक सहायक, समावेशी और सहयोगी शैक्षिक माहौल तैयार करना है, जो प्रत्येक छात्र के सर्वांगीण विकास, बेहतर स्वास्थ्य और चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बढ़ावा दे।
सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों और हितधारकों को ‘पेरेंटिंग कैलेंडर’ को सक्रिय रूप से अपनाने और लागू करने की अपील की है, जिससे छात्रों के लिए एक सहायक, समावेशी और सहयोगी शैक्षिक वातावरण तैयार किया जा सके। सीबीएसई पैरेंटिंग कैलेंडर अब सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse.gov.in पर उपलब्ध है।
सीबीएसई पेरेंटिंग कैलेंडर 2026-26 डायरेक्ट लिंक - https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/CBSE_Parenting_Calendar-2026-2027_29042026.pdf
शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के लिए ‘पेरेंटिंग कैलेंडर’ में विद्यार्थियों के विकास के सभी पहलुओं शैक्षणिक, भावनात्मक, सामाजिक और व्यक्तिगत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं: