सीबीएसई-एनसीबी ने छात्रों में नशीली दवाओं की रोकथाम के लिए साइन किया एमओयू, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
Santosh Kumar | September 3, 2025 | 02:13 PM IST | 1 min read
500 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के लिए मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 3 सितंबर 2025 को गृह मंत्रालय के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करके नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। यह हस्ताक्षर समारोह सीबीएसई मुख्यालय, द्वारका, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य नशा मुक्त स्कूली वातावरण बनाने और नशीली दवाओं के सेवन के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में सहयोग को मजबूत करना है।
एनसीबी के महानिदेशक अनुराग गर्ग और सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह ने एनसीबी और सीबीएसई के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अनुराग गर्ग ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया।
नशीली दवाओं की रोकथाम पर ई-मॉड्यूल
महानिदेशक ने ड्रग्स के खतरे से निपटने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला तथा जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और परामर्श कार्यक्रम आयोजित करने में एनसीबी के सहयोग की पुष्टि की।
इस समझौता ज्ञापन के तहत त्रैमासिक जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए प्रशिक्षण, नशीली दवाओं की रोकथाम पर ई-मॉड्यूल और सामुदायिक जागरूकता पहल आयोजित की जाएंगी।
500 से अधिक स्कूलों के प्राचार्य हुए शामिल
पायलट प्रोजेक्ट शुरुआत में 100 सीबीएसई स्कूलों में शुरू होगा। हस्ताक्षर समारोह के बाद, 500 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के लिए मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जहां भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आशुतोष अग्निहोत्री ने स्कूलों में नेतृत्व की भूमिका पर और डॉ. अनीस ने नशा निवारण पर एक सत्र लिया। कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।
जहां देश भर के प्रधानाचार्यों और परामर्शदाताओं ने विशेषज्ञों के साथ बातचीत की, अपनी चिंताओं को साझा किया और स्कूल स्तर पर नशीली दवाओं की रोकथाम की पहल को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों की खोज की।
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