न्यायालय ने यूकेपीएससी उत्तर पुस्तिका निरीक्षण संबंधी नियमों को बताया असंवैधानिक, आंसर शीट जांचने की दी अनुमति
Press Trust of India | March 12, 2026 | 08:20 AM IST | 2 mins read
खंडपीठ ने आदेश में कहा कि उम्मीदवारों को मूल्यांकन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता।
नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा से जुड़े उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही करने की अनुमति दी जाती थी। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अतिरिक्त निजी सचिव (एपीएस) पद पर भर्ती के लिए आयोजित 'शॉर्टहैंड' परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने असफल उम्मीदवारों को उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने का अधिकार प्रदान किया। खंडपीठ ने आदेश में कहा कि उम्मीदवारों को मूल्यांकन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता।
राजवीर सिंह, रणवीर सिंह तोमर, रुचि राणा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने 3 फरवरी को घोषित 'शॉर्टहैंड' परीक्षा के परिणाम को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया। उनका का कहना था कि आयोग ने उन्हें आंसर शीट का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी।
UKPSC Results: याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी
यूकेपीएससी में अतिरिक्त निजी सचिव के 99 पदों पर भर्ती के लिए 18 जुलाई 2024 को विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया के पहले चरण में हिंदी व अंग्रेजी टाइपिंग, कंप्यूटर ज्ञान और शॉर्टहैंड जैसे कौशल परीक्षण शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के पहले चरण की अन्य परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थीं और 'शॉर्टहैंड' परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया था, इसके बावजूद उन्हें परिणाम में चयनित नहीं किया गया।
इस कारण मूल्यांकन में त्रुटियों के संदेह के आधार पर उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। बता दें कि इस चरण में सफल होने वाले अभ्यर्थी ही दूसरे चरण की लिखित परीक्षा में शामिल होने के पात्र थे।
UKSPC Results: कोर्ट ने आयोग के नियमों को बताया असंवैधानिक
आयोग अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण की अनुमति देता है। अदालत ने इस प्रावधान को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि अगर निरीक्षण में अत्यधिक देरी होती है तो उम्मीदवारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना की श्रेणी में आती है और उम्मीदवार को उसका निरीक्षण करने तथा उसकी प्रति प्राप्त करने का अधिकार है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित 'नोट-चार' को उस सीमा तक निरस्त माना जाए, जहां तक वह आंसर शीट जांचने से रोकता है। निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को आंसर शीट का निरीक्षण करने तथा उनकी प्रतियां प्राप्त करने की अनुमति दी जाए।
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