Press Trust of India | August 4, 2026 | 12:09 PM IST | 2 mins read
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रदेश के करीब 4,000 विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइनें गुजर रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।

नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad HC) की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जर्जर भवनों के साथ-साथ गैर-संरचनात्मक खतरे भी बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम हैं। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ गोमती रिवर बैंक रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रदेश के करीब 4,000 विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइनें गुजर रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। अदालत ने इस पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के प्रबंध निदेशक को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
पीठ ने जौनपुर के समरी प्राथमिक विद्यालय की इमारत गिरने तथा लखनऊ में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के एक स्कूल में लोहे का गेट गिरने से एक छात्र की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को सुरक्षित बनाना समय की आवश्यकता है। अदालत ने स्कूल बसों और वैन से बच्चों के सुरक्षित आवागमन का मुद्दा भी उठाया।
अदालत को बताया गया कि परिवहन विभाग के अनुसार 2,370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 की ‘मिशन भरोसा’ के तहत पुलिस सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल पाई गई है। अदालत ने कहा कि वाहन चालकों की पृष्ठभूमि का सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए और स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में पूरी सतर्कता बरतनी होगी।
लखनऊ पुलिस ने अदालत को बताया कि विद्यालयों के प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। अदालत ने अगली सुनवाई तक कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अंतिम चरण में है और इसे अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। पीठ ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगी।