Saurabh Pandey | October 27, 2026 | 04:47 PM IST | 1 min read
यूपी में 1.70 लाख शिक्षणेत्तर कार्मिकों को सरकार ने सौगात दी है। बेसिक और माध्यमिक स्कूलों के कर्मचारियों और आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर (नॉन-टीचिंग) कर्मचारियों के हित में एक और बड़ा निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश के कुल 1,70,366 शिक्षणेत्तर कार्मिकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
सरकार के इस फैसले से बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,304 तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के 48,062 शिक्षणेत्तर कार्मिकों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों, सहायता प्राप्त/वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों और वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
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इस योजना के लागू होने के बाद सभी पात्र शिक्षणेत्तर कार्मिकों और उनके परिजनों को राज्य के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध (एमपैनल्ड) निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने (IPD - Inpatient Department) की कैशलेस सुविधा मिलेगी। सरकार के इस कदम से शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान होने वाले बड़े वित्तीय बोझ से स्थायी राहत मिलेगी।
कैट 2026 परीक्षा पैटर्न के अनुसार, पेपर में वर्बल एबिलिटी एंड रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन (VARC), डेटा इंटरप्रिटेशन एंड लॉजिकल रीजनिंग (DILR) और क्वांटिटेटिव एबिलिटी (QA) से प्रश्न पूछे जाएंगे।
Abhay Pratap Singh