Santosh Kumar | January 29, 2025 | 03:56 PM IST | 2 mins read
पीठ ने कहा कि राज्य कोटे के भीतर पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश में निवास-आधारित आरक्षण प्रदान करना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज (29 जनवरी) कहा कि पीजी मेडिकल सीटों में निवास-आधारित आरक्षण अस्वीकार्य है क्योंकि यह असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा, "पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में निवास-आधारित आरक्षण स्पष्ट रूप से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।"
पीठ ने कहा कि राज्य कोटे के भीतर पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश में निवास-आधारित आरक्षण प्रदान करना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि राज्य कोटे की सीटें नीट परीक्षा में मेरिट के आधार पर भरी जानी चाहिए।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एक मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए तीन जजों की बेंच ने कहा कि वह प्रदीप जैन और सौरभ चंद्रा मामलों में पहले दिए गए फैसलों को दोहरा रही है। जस्टिस धूलिया ने कहा, "हम सभी भारत में रहते हैं।"
उन्होंने कहा कि प्रांतीय या राज्य निवास जैसी कोई चीज़ नहीं होती। केवल एक निवास होता है। हम सभी भारत के निवासी हैं। हमें भारत में कहीं भी निवास चुनने और देश में कहीं भी व्यापार और व्यवसाय करने का अधिकार है।"
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का लाभ राज्य के निवासियों को एमबीबीएस स्तर तक ही दिया जा सकता है, लेकिन पीजी पाठ्यक्रमों में, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जाता है, निवास के आधार पर आरक्षण देना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि निर्णय पहले से दिए गए निवास आरक्षण को प्रभावित नहीं करेगा। जो छात्र पीजी पाठ्यक्रम कर रहे हैं और जो पहले से ही ऐसे निवास श्रेणी से उत्तीर्ण हैं, वे प्रभावित नहीं होंगे। बता दें कि यह मामला 2019 का है।
जब अदालत की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई की, जिसने इसी तरह का फैसला सुनाया था, यानी पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए निवास-आधारित आरक्षण असंवैधानिक है। हालांकि, बाद में दो-न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को तीन-न्यायाधीशों की पीठ को भेज दिया।