Manusmriti Row: डीयू में मनुस्मृति पढ़ाने का प्रस्ताव खारिज, बसपा प्रमुख मायावती ने किया फैसले का स्वागत
Press Trust of India | July 12, 2024 | 04:56 PM IST | 3 mins read
विधि संकाय ने अपने प्रथम और तृतीय वर्ष के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन करने के लिए डीयू की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था से मंजूरी मांगी थी।
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि पाठ्यक्रम में मनुस्मृति को शामिल करने के प्रस्ताव को कुलपति ने खारिज कर दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसी किसी योजना का समर्थन नहीं किया है। प्रधान ने पीटीआई से कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने गुरुवार (11 जुलाई) को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से बात की। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए इस फैसले का स्वागत किया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा, "कल हमें जानकारी मिली कि 'मनुस्मृति' विधि संकाय के पाठ्यक्रम का हिस्सा होगी। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से बात की और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि विधि संकाय के कुछ सदस्यों ने न्यायशास्त्र अध्याय में कुछ बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अकादमिक परिषद के उचित आधिकारिक निकाय में इस तरह के प्रस्ताव के लिए कोई समर्थन नहीं है। कल ही कुलपति ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।"
DU on Manusmriti: कुलपति ने क्या कहा?
प्रधान ने कहा कि सरकार संविधान की सच्ची भावना को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि विधि संकाय ने अपने प्रथम और तृतीय वर्ष के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन करने के लिए डीयू की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था से मंजूरी मांगी थी। विश्वविद्यालय के कुलपति ने गुरुवार को स्पष्ट किया था कि सुझावों को खारिज कर दिया गया है और छात्रों को हस्तलिपि नहीं पढ़ाई जाएगी।
सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, "विधि संकाय द्वारा एक प्रस्ताव डीयू को प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में, उन्होंने न्यायशास्त्र नामक पेपर में बदलाव का सुझाव दिया था। परिवर्तनों में से एक मनुस्मृति पर पाठ शामिल करना था। हमने सुझाए गए पाठ और संकाय द्वारा प्रस्तावित संशोधन दोनों को अस्वीकार कर दिया है। छात्रों को इस तरह की कोई भी चीज नहीं पढ़ाई जाएगी।"
मायावती ने कहा- संविधान के खिलाफ
बसपा प्रमुख मायावती ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विधि छात्रों को ‘मनुस्मृति’ पढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज करने के फैसले का स्वागत किया। मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में मनुस्मृति पढ़ाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध स्वाभाविक है, जो भारतीय संविधान और उसके समतावादी एवं कल्याणकारी उद्देश्यों की गरिमा के खिलाफ है और इस प्रस्ताव को रद्द करने का फैसला स्वागत योग्य कदम है।’’
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने उपेक्षितों और महिलाओं के आत्मसम्मान तथा मानवतावाद और धर्मनिरपेक्षता को ध्यान में रखते हुए सर्वमान्य भारतीय संविधान की रचना की, जो मनुस्मृति से कतई मेल नहीं खाता। इसलिए ऐसा कोई भी प्रयास कतई उचित नहीं है।’’
बता दें कि प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, मनुस्मृति पर दो पाठ - जी एन झा द्वारा मेधातिथि के मनुभाष्य के साथ मनुस्मृति और टी कृष्णस्वामी अय्यर द्वारा मनुस्मृति की टिप्पणी - स्मृतिचंद्रिका - छात्रों के लिए पेश किए जाने का प्रस्ताव था।
इस कदम पर आपत्ति जताते हुए वाम समर्थित सोशल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एसडीटीएफ) ने डीयू के कुलपति को पत्र लिखकर कहा है कि यह महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों के प्रति “प्रतिगामी” दृष्टिकोण का प्रचार करती है।
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- NEET Exam: नीट की कंप्यूटर आधारित परीक्षा से गड़बड़ियों पर लगेगी रोक, बोले पूर्व यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार
- JEE Main 2026 Session 2: जेईई मेन सेशन 2 के लिए परसेंटाइल, रॉ मार्क्स व नॉर्मलाइजेशन का सरल विश्लेषण जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी भोपाल में बीटेक प्रवेश के लिए जेईई मेन में कितने अंक होने चाहिए; जानें कटऑफ, फीस, पैकेज
- JEE Main 2026 Cutoff for General Category: जेईई मेन 2026 के लिए सामान्य कैटेगरी की अपेक्षित कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी पटना के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- JEE Main 2026: एनआईटी इलाहाबाद में प्रवेश के लिए जेईई मेन में कितने अंक चाहिए? पात्रता, फीस और कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी दिल्ली के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, ‘लाडू’, ‘रोटलो’ और ‘मोटो बापो’ जैसे स्थानीय शब्द होंगे शामिल
- राजस्थान में 7,000+ कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जताया विरोध
- अगले 5 साल में 10 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की योजना, आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी जानकारी