Saurabh Pandey | June 13, 2026 | 11:46 AM IST | 2 mins read
एनटीए ने CUET PG 2026 में री-एग्जाम देने वाले छात्रों को नॉर्मलाइजेशन का फायदा मिलने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने साफ किया कि इस परीक्षा में किसी भी छात्र का नॉर्मलाइजेशन नहीं हुआ है और सभी को केवल उनके वास्तविक अंकों के आधार पर ही स्कोर दिया गया है।

नई दिल्ली : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सोशल मीडिया पर CUET PG 2026 परीक्षा को लेकर चल रही अफवाहों और आशंकाओं पर अपनी स्थिति साफ की है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे थे कि कुछ विषयों की परीक्षा एक से अधिक तारीखों पर कराई गई और दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को 'नॉर्मलाइजेशन' (अंकों को बराबर करने की प्रक्रिया) का फायदा मिला। इन अफवाहों को रोकने के लिए एनटीए ने स्पष्ट किया है कि सभी छात्रों का मूल्यांकन पूरी तरह से निष्पक्ष और एक ही आधार पर किया गया है।
एनटीए के अनुसार, मार्च 2026 में परीक्षा के दौरान मेघालय के तुरा में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई थी, साथ ही कुछ विदेशी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं आ गई थीं। इस वजह से 28 अलग-अलग विषयों के 565 छात्र अपनी तय तारीख पर परीक्षा नहीं दे पाए थे।
एजेंसी ने कहा कि उनकी यह नीति है कि जिन परिस्थितियों के लिए छात्र जिम्मेदार नहीं हैं, उनके लिए उन्हें सजा न मिले। इसीलिए, इन 565 छात्रों के लिए 29 और 30 मार्च 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी।
सोशल मीडिया के दावों को खारिज करते हुए एनटीए ने बताया कि किसी भी छात्र को नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया से छूट नहीं दी गई है, क्योंकि CUET PG परीक्षा में किसी का भी नॉर्मलाइजेशन नहीं किया जाता। मुख्य परीक्षा हो या दोबारा हुई परीक्षा, एनटीए हर छात्र को उसके वास्तविक अंक ही देता है। आसान शब्दों में कहें तो री-एग्जाम देने वाले छात्रों के नंबर भी ठीक उसी तरह जोड़े गए हैं जैसे बाकी सभी छात्रों के।
एजेंसी ने समझाया कि मुख्य परीक्षा देने वाले और दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर था, इसलिए उनके बीच नॉर्मलाइजेशन करना गणितीय रूप से भी संभव नहीं था। जैसे-
एनटीए का कहना है कि सिर्फ 100 छात्रों के ग्रुप की तुलना हजारों छात्रों से करके अंकों को बराबर (नॉर्मलाइज) नहीं किया जा सकता।
एनटीए ने यह भी साफ किया कि दोबारा कराई गई परीक्षा के प्रश्नपत्र अचानक या बाद में नहीं बनाए गए थे। ये पेपर पहले से ही विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए सेट का हिस्सा थे। विशेषज्ञों ने इस बात को प्रमाणित किया था कि दोबारा होने वाली परीक्षा के पेपर का कठिनाई स्तर बिल्कुल मुख्य परीक्षा जैसा ही था। एजेंसी ने अंत में दोहराया कि वह परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और छात्रों के हित में आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।