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Anti-Ragging Day: एनएमसी ने मेडिकल संस्थानों से 12 अगस्त को एंटी-रैगिंग दिवस मनाने का किया अनुरोध

Santosh Kumar | August 8, 2025 | 02:00 PM IST | 1 min read

यूजीसी ने वर्ष 2023 में यह निर्णय लिया था कि 12 अगस्त को 'रैगिंग-रोधी दिवस' और 12 से 18 अगस्त तक 'रैगिंग-रोधी सप्ताह' के रूप में मनाया जाएगा।

एनएमसी ने नोटिस जारी कर देश के सभी चिकित्सा संस्थानों से 12 अगस्त को 'रैगिंग-रोधी दिवस' के रूप में मनाने को कहा है।(प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
एनएमसी ने नोटिस जारी कर देश के सभी चिकित्सा संस्थानों से 12 अगस्त को 'रैगिंग-रोधी दिवस' के रूप में मनाने को कहा है।(प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने एक नोटिस जारी कर देश के सभी चिकित्सा संस्थानों से 12 अगस्त को 'रैगिंग-रोधी दिवस' के रूप में मनाने और 12 से 18 अगस्त तक 'रैगिंग-रोधी सप्ताह' आयोजित करने को कहा है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2023 में यह निर्णय लिया था कि रैगिंग के खिलाफ जागरुकता बढ़ाने के लिए 12 अगस्त को 'रैगिंग-रोधी दिवस' और 12 से 18 अगस्त तक 'रैगिंग-रोधी सप्ताह' के रूप में मनाया जाएगा।

एनएमसी ने कहा, ‘‘यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की समस्या को समाप्त करने के लिए नियम बनाए हैं। ये नियम अनिवार्य हैं और सभी संस्थानों को इनका पूर्ण रूप से पालन करना आवश्यक है, जिसमें निगरानी तंत्र भी शामिल है।’’

रैगिंग रोकने के लिए विभिन्न कार्यक्रम

यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम और मीडिया अभियान भी शुरू किए हैं। आयोग ने बताया कि रैगिंग पर रोक से संबंधित वीडियो भी उसकी वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं, जिन्हें उच्च शिक्षण संस्थान उपयोग कर सकते हैं।

एनएमसी ने नोटिस में यूजीसी का परामर्श भी संलग्न किया गया है, जिसमें संस्थानों से नारा लेखन, निबंध लेखन, पोस्टर बनाना, लोगो डिजाइनिंग, नुक्कड़ नाटक, फोटोग्राफी, वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने का आग्रह किया गया है।

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प्रमाणपत्र और पुरस्कार देने का सुझाव

प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रमाणपत्र और पुरस्कार देने का सुझाव भी दिया गया है। सोशल मीडिया अभियानों, संस्थान प्रमुखों के वीडियो संदेश वेबसाइट पर प्रदर्शित करने तथा रैगिंग-रोधी लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग की भी सलाह दी गई है।

यूजीसी ने यह भी कहा है कि कॉलेज परिसर में कार्यशालाएं, सेमिनार, चर्चा सत्र और रचनात्मक गतिविधियां जैसे 'सेल्फी कॉर्नर' लगाकर जागरूकता बढ़ाई जाए। साथ ही, छात्रों को डिजिटल पोस्टर, रील और लघु वीडियो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

इनपुट-पीटीआई

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