NITI Aayog Report: देश में करीब 87,000,000 युवा न पढ़ाई कर रहे, न रोजगार में हैं और न प्रशिक्षण ले रहे-रिपोर्ट
Press Trust of India | August 22, 2026 | 07:44 PM IST | 2 mins read
रिपोर्ट में युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने और स्थानीय जरूरतों तथा उभरते क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली: देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने और स्थानीय जरूरतों तथा उभरते क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों की तत्काल जरूरत पर जोर दिया गया है।
विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नयी कल्पना -
नीति आयोग ने ‘विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नयी कल्पना’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा कि यह अनुमान वर्ष 2021 में किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (78वें दौर) के आंकड़ों पर आधारित है।
आयोग ने देश के कार्यबल और शिक्षार्थियों को बेहतर प्रभाव के लिए पांच वर्गों में बांटा है। इनमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक एवं अनौपचारिक तथा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवाओं का वर्ग और महिलाएं शामिल हैं।
नीति आयोग ने कहा, “शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवा आय के अभाव और पहले की शिक्षा पर हुए खर्च के कारण कई चुनौतियों का सामना करते हैं। विद्यार्थी अक्सर अपनी मौजूदा आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ शुल्क आधारित कौशल प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाते हैं।”
केवल 8.25% स्नातक अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर रहे -
रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवाओं और महिलाओं के लिए किफायती या सब्सिडी वाले प्रशिक्षण विकल्पों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
इसमें कहा गया कि खासकर कम आय वाले परिवारों के विद्यार्थी पहले ही कॉलेज के शुल्क और कई मामलों में निजी ट्यूशन के खर्च से दबाव में रहते हैं। ऐसे में पारंपरिक डिग्री के साथ अतिरिक्त शुल्क आधारित कौशल प्रशिक्षण में निवेश करना कई लोगों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पाता।
आयोग ने कहा कि इसके कारण कई विद्यार्थी स्नातक के बाद परिवार की आर्थिक मदद के लिए स्थायी आय वाले किसी भी रोजगार को चुन लेते हैं, भले ही वहां वेतन कम हो।
नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्नातक करने वाले केवल 8.25 प्रतिशत लोग ही अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर रहे हैं।
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