MPPSOSEB: एनआईओएस और मध्य प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए की साझेदारी
Abhay Pratap Singh | February 4, 2025 | 11:41 AM IST | 2 mins read
ओपन स्कूल को मजबूत करने के लिए एनआईओएस के कार्यक्रमों को क्षेत्रीय भाषाओं में लागू करना आदि एनआईओएस और मध्य प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सहयोग के लिए आवश्यक है।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) और मध्य प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा बोर्ड (MPPSOSEB) ने साझेदारी की है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षार्थियों को कुशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे वे व्यावसायिक क्षेत्र में दक्षता हासिल कर सकें और रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, “शिक्षा और प्रशिक्षण/कौशल के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने समान और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु 2020 में एक समग्र और परिवर्तनकारी नीति- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) तैयार की है। इस शिक्षा नीति में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर बल दिया गया है।”
आगे कहा गया कि, व्यावसायिक शिक्षा को सामान्य शिक्षा के साथ एकीकृत करने और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में लाने की सिफारिश की गई है। एनईपी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, समग्र शिक्षा की मौजूदा योजना को नया रूप दिया गया है और व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न नए मध्यवर्तनों जैसे इंटर्नशिप, बैगलेस डे, उच्च प्राथमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के संपर्क आदि को समर्थन किया गया है।
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प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ओपन स्कूल को मजबूत करने के लिए एनआईओएस के कार्यक्रमों को क्षेत्रीय भाषाओं में लागू करना आदि एनआईओएस और मध्य प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सहयोग के लिए आवश्यक है। साथ ही, पूरे मध्य प्रदेश राज्य के लिए विभिन्न व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
एनआईओएस के नोटिस में कहा गया कि, “इसलिए, एनआईओएस और एमपी ओपन स्कूल की साझेदारी पूरे मध्य प्रदेश राज्य के लिए एनआईओएस के विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पेशकश करेगी।”
नोटिस में आगे कहा गया कि, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड के 2500 सरकारी स्कूलों के माध्यम से संचालित होंगे। इससे व्यावसायिक शिक्षा की पहुंच जन सामान्य के घर तक होगी, वहीं मध्य प्रदेश राज्य के शिक्षार्थियों को कुशल प्रशिक्षण और दक्षता के उपरांत रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
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